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    1857 के अमर शहीद हज़रत अल्लामा फजले हक खैराबादी अलैहिर्रहमा की 159 वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित

    1857 के अमर शहीद हज़रत अल्लामा फजले हक खैराबादी अलैहिर्रहमा की 159 वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित

    (देश के प्रति उनके द्वारा दिए गये योगदानों का किया गया बखान, दास्तां सुनने वालों का सीना हुआ फक्र से चौड़ा)

    खैराबाद/सीतापुर.
    स्थानीय मदरसा अल्लामा फजले हक खैराबादी मेमोरियल कॉलेज में 1857 के अमर शहीद मर्दे मुजाहिद जलील हज़रत अल्लामा फजले हक खैराबादी अलैहिर्रहमा की 159 वीं पुण्य तिथि पर कोविड-19 की गाइड लाइन के अनुसार कोरोना महामारी से बचाव को ध्यान में रखते हुए मदरसा में एक संक्षिप्त कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इससे पूर्व मदरसे के कुछ शिक्षकों तथा प्रबंध समिति के अध्यक्ष नजमुल हसन शोएब मियां,संस्थापक काज़िम हुसैन इमरान सिद्दीकी  व उप प्राचार्य एहतिशाम आलम अल्लामा फजले हक़ खैराबादी व राजा हरि प्रसाद स्मारक पर पहुंचे. जहां सभी ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए. इसके बाद उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए समिति के अध्यक्ष एवम दरगाह बड़े मखदूम साहब के सज्जादानशीन शोएब मियां ने कहा कि अल्लामा फजले हक़ अलैहिर्रहमा की 1857 की कुर्बानी को फरामोश भुलाया नही जा सकता पर अफसोस है कि आज हमारी तारीख अर्थात इतिहास में कहीं भी आपका नाम तक नही दर्ज है।

    मालूम हो कि 1857 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद अल्लामा फजले हक खैराबादी ने जेहाद का फतवा दिया था कि अंग्रेजों हिन्दुस्तान छोडो इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोग घरों से बाहर निकल करअंग्रेजों से युद्व करने मैदान में आ गए जिसमे सैकड़ों की तादाद में उलमाए किराम मौलानाओं को क़त्ल कर दिया गया और आपको गिरफ्तार करके मुक़दमा चलाया गया सन  1859  में आपको काले पानी की सज़ा देते हुए अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के क़ैद खाने में  डाल दिया गया उस क़ैदखाने की जेल यानी बैरक की हालत ये थी कि उसमे न तो सीधे खड़े हो सकते थे न लेट सकते थे इतनी सख़्त सज़ा दी गई तत्पश्चात 20 अगस्त 1861 को आप की मृत्यु उसी क़ैदख़ाने में हो गई।

    इसी कारण आज हम सब उनको श्रधांजलि देने के लिए इकट्ठा हुए हैं ।
    इसी अवसर पर मैनेजर हाजी आसिम हुसैन ने कहा कि उन्ही के नाम से इस संस्था को कायम किया गया कि शिक्षा के द्वारा ही सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की जा सकती है।संस्था के संस्थापक व्यवस्थापक काज़िम हुसैन ने अपने वक्तव्य में कहा कि अल्लामा फजले हक़ इसी क़स्बा खैराबाद के रहने वाले थे और बेहतरीन शिक्षक तो थे ही साथ मे एक अच्छे आलिम भी थे उनकी याद को हमेशा क़ायम रखने के लिए ही इस संस्था की स्थापना 1993/94 में कई गई थी ताकि पढ़ लिखकर बच्चा जब बड़ा हो तो अल्लामा फजले हक़ की शिक्षा को आगे तक बढ़ाए।इस मौके पर मदरसे के शिक्षको में मोहम्मद अय्यूब, ,अब्दुल हफ़ीज़, हाफ़िज़ मुशीर, सिराज अहमद रुबीना परवीन, ,कर्मचारी अकील अहमद मुन्ना आदि ने प्रतिभाग किया जबकि एहतिशाम आलम उप प्राचार्य ने संचालन एवम आभार व्यक्त किया।

     शरद कपूर
      सीतापुर

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