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    सीतापुर में कुछ इस तरह परवान चढ़ रही है केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, बच्चों को मिलने वाला पोषाहार जानवरों का बढ़ा रहा है पोषण

    सीतापुर में कुछ इस तरह परवान चढ़ रही है केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, बच्चों को मिलने वाला पोषाहार जानवरों का बढ़ा रहा है पोषण

    सीतापुर.
    सीतापुर जिला आखिर बच्चों के कुपोषण से आखिर कैसे मुक्त होगा जब प्रोटीन आयोडीन युक्त आहार बच्चों के स्थान पर दूध डेरियों की गाय-भैंस खा रही हैं, दूध डेरियों के आस-पास पड़े खाली रैपर बच्चों को कुपोषण मुक्त करने की स्वयं गवाही दे रहे हैं | सूत्रों की यदि माने तो विभागीय कारिंदे ही केन्द्र सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना को पलीता लगा रहे हैं |
            नौनिहाल बच्चों महिलाओं की सेहत को दुरुस्त करने के लिए बना महकमा बाल विकास एवं पुष्टाहार नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र में धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रहा है । बच्चों में कुपोषण की भयावहता को देखते हुए बाल विकास परियोजना चलाकर सरकार ने बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए ही आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना कर जो सपना सजाया उस सपने को जिम्मेदार किसी भी मायने में जमीनी स्तर पर लागू न होने देने की कोरोना काल में जैसे शपथ ही ले चुके हैं । गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की सेहत एवं विभाग द्वारा पौष्टिक आहार इन महिलाओं को न मिलकर जानवरों की सेहत को दुरुस्त किया जा रहा है । जिससे बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपए विभाग सहित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते जहां खुद को सेहतमंद बनाते हुए अपनी तिजोरियों को भर रहे हैं ।

    वही कोरोना का बहाना बना कागजों पर ही बालवाड़ी में पंजीकृत बच्चों को व गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पोषाहार सहित अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है । विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि विभाग में आने वाली पौष्टिक दलिया नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भैंसों का पालन एवं दूध डेरी का संचालन करने वाले व्यक्तियों को जिम्मेदारों के द्वारा अंदर खाने से सीधे-सीधे सप्लाई की जा रही है। जिसकी बानगी यह है कि नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में दूध डेरियो के अगल-बगल भारी मात्रा में पौष्टिक दलिया के खाली पड़े रैपरो को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों एवं गर्भवती व धात्री महिलाओं की सेहत को किस तरह ठीक किया जा रहा है । जबकि राज्य सरकार इस मद में करोड़ों रुपए पानी की तरह से बहा रही है। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि विभागीय गोदाम से पौष्टिक दलिया के उठान के समय ही स्थानीय विभागीय मुखिया द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र की संचालिकाओं से जमकर धन उगाही की जाती है। जिसके चलते आंगनबाड़ी केंद्र की संचालिकाओं के द्वारा इस घिनौने कृत्य में संलिप्त होना लाजमी है । फिलहाल नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में दूध संचालकों की डेरियो के अगल-बगल भारी संख्या में खाली पड़े पौष्टिक दलिया के रैपर इस बात की प्रत्यक्ष गवाही दे रहे हैं कि विभागीय महकमे के द्वारा बच्चों एवं महिलाओं की सेहत को कैसे दुरुस्त किया जा रहा है । वंही प्रधानमंत्री के सुपोषित भारतीय नागरिक एवं स्वस्थ्य समाज की संकल्पना तथा उसके लिए लक्षित प्रयासों पर पानी फिर रहा है ।
              बिसबाँ क्षेत्र की यह कहानी तो सिर्फ एक बानगी है कमोवेश संपूर्ण जिले में कुछ इसी तरह से देश के नौनिहालो को कुपोषण से मुक्त किया जा रहा है | यहां पर भी यदि विभागीय सूत्रों की बात मानी जाए तो आँगनबाड़ी कार्यकर्तियों के सामने यह प्रोटीन युक्त आहार बेचना मजबूरी बन जाती है | क्योंकि प्रत्येक माह इनको मिलने वाले मानदेय से एक निश्चित रकम इनको देना पड़ता है, साथ ही विकास खण्ड स्तर पर स्थापित आँगनबाड़ी मुख्यालय से अपने घर तक और फिर घर से संबंधित आँगनबाड़ी केन्द्र तक की ढुलाई भी कार्यकर्तियों को अपनी जेब से भरना होता है |
               अब जाहिर सी बात है कि मानदेय से कटने वाले व खर्च किए गए पैसे की भरपाई कहीं ना कहीं से तो की ही जायेगी |

              शरद कपूर / आलोक अवस्थी
    आई एन ए न्यूज़ सीतापुर  - उत्तर प्रदेश

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