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    प्रधानमंत्री के स्वरोजगार योजना को परवान चढ़ा रही हैं बिसबाँ की चार महिलाएं

    प्रधानमंत्री के स्वरोजगार योजना को परवान चढ़ा रही हैं बिसबाँ की चार महिलाएं
    स्वावलंबी महिलाओं की हौसला अफजाई कर रहे हैं परिजन
    सीतापुर.
    सामाजिक बंधनों की बेड़ियों में जकड़ी आज की नारी अपने जीवन में तमाम जद्दोजहद कर आगे बढ़ रही हैं । इस संघर्ष में कभी कोई एक कदम आगे तो कभी दो कदम पीछे भी जा रही हैं। लेकिन कहा जाता है कि जिद और हौसले के आगे बड़ा सा बड़ा पहाड़ भी रास्ता छोड़ने पर मजबूर हो जाता है ।
    संगीता शुक्ला

    समाज की रूढ़िवादी परंपराओं को पीछे धकेलते हुए अपने दम पर तहसील बिसबाँ क्षेत्र की चार महिलाएं तमाम बंधनों को तोड़कर अपने दम पर अपना व अपने परिवार को बुलंदियों पर पहुंचाने का कार्य अपने कठिन परिश्रम के बलबूते अंजाम दे रही हैं ।
    मीना विश्वकर्मा

           तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत बिसवाँ देहात गोपाल नगर निवासी संगीता शुक्ला अपने सिलाई कढ़ाई के दम पर जहां स्वयं आत्मनिर्भर हुई हैं । वही सैकड़ों महिलाओं को सिलाई कढ़ाई का हुनर देकर उनके स्वावलंबन में हमराह हो चुकी हैं। जबकि इनके पति प्राइवेट स्कूल में टीचिंग का कार्य करते हैं जिससे घर के खर्चे चलाने में हो रही दिक्कतों को देखते हुए कुछ करने की ठानी आज वह स्वयं अपने पैरों पर खड़ी हैं । इनके इस प्रयास से क्षेत्र के कई सैकडा परिवारों की महिलाएं भी आत्मनिर्भर हुई हैं।
    रोशन जहां

    वही नगर सेठ गंज निवासी निधी अग्रवाल जहां फैशन डिजाइनर सहित आधुनिकता के दौर में बड़े बड़े प्रशिक्षित डिजायनरों को मात दे रही है वंही बाजार में नए नए तरीके के कपड़ों का प्रचलन है वही आज के दौर में निधी अग्रवाल जैसी महिलाएं अपने घर के कार्यों को करते हुए लेडीज पोशाक में नई नई डिजाइनों के बढ़ते प्रचलन की डिजाइनिंग को कटिंग के माध्यम से काटकर नई नई पोशाकों को सिल कर अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रही हैं। वही नगर के थाना तहसील प्रथम की निवासी मीना विश्वकर्मा अपने सिलाई के हुनर के दम पर जहां एक बेटी का घर बसा चुकी हैं वही दो बेटियों को अपने इसी गुण के दम पर होने वाली आमदनी से दो बेटियों को शिक्षित करने का कार्य भी बाखूबी कर रही हैं जबकि इनके पति के पास कोई रोजगार का साधन नहीं है ।
    निधि अग्रवाल

    वही जहां नगर में मिल्की टोला निवासी रोशन जहां पुत्री नसीर जो कि दोनों पैरों से दिव्यांग हैं लेकिन इसे कहते हैं कि ईश्वर जब भी किसी के शरीर में कोई कमी करता है तो उसकी भरपाई भी ईश्वर किसी न किसी बहाने जरूर करता है । वही गुण ईश्वर ने रोशन जहां की हिम्मत और हौसले को देखते हुए उसको प्रदान किया है अपनी दिव्यांगता को दरकिनार करते हुए रोशन जहां आज समाज में तमाम निशक्त महिलाओं के लिए नजीर बनती जा रही हैं । रोशन जहां महिलाओं के कपड़े हर डिजाइन की कटिंग कर उनको सिलने की महारत हासिल कर स्वयं तो आत्मनिर्भर है ही वही अपने परिवार के खर्चे के बोझ को भी उठा रही हैं। ऐसी सशक्त एवं आत्मनिर्भर महिलाओं को सरकार को चाहिए की इन महिलाओं के हुनर एवं हौसले को बढ़ाने के लिए आर्थिक सहयोग कर समाज में हाशिए पर पड़ी अन्य महिलाओं को इन सशक्त महिलाओं के माध्यम से जागरूक करते हुए स्वावलंबन के लिए और अधिक प्रेरित किया जा सके ।

           शरद कपूर/ आलोक अवस्थी
       आई एन ए न्यूज़ सीतापुर  - उत्तर प्रदेश

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