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    कुशीनगर : बेसिक विभाग का खेल- रोस्टर को दरकिनार कर शिक्षको का किया गया है पदोन्नति

    कुशीनगर : बेसिक विभाग का खेल- रोस्टर को दरकिनार कर शिक्षको का किया गया है पदोन्नति

     पूर्व के व्लाक और न्याय पंचायतों मे बने रहने के लिए शिक्षको से वसूल किया गया है पचास हजार से एक लाख रुपये
    ना रोस्टर का किया गया पालन और ना ही कार्यालय पर चसापा किया गया सूची

    कुशीनगर।
    अपने कारगुजारियो को लेकर हमेशा चर्चा मे रहने वाला बेसिक शिक्षा विभाग एक बार फिर चर्चा मे है। चर्चा-ए-सरेआम है कि लॉकडाउन के दौरान विभाग-ए-शहंशाह द्वारा शिक्षको से मोटी रकम वसूल कर बैक डेट मे गाइड लाइन और रोस्टर की धज्जियां उडाते हुए प्रमोशन किया गया है। चर्चाओ के बाजार मे इस बात की चर्चा भी जोरों पर है कि प्रत्येक शिक्षको से पचास हजार से लेकर एक लाख रुपये वसूल किया गया है जिसके बदले मे उन शिक्षको को रोस्टर के विपरीत उसी व्लाक मे प्रमोशन कर कार्यभार ग्रहण करा दिया गया है। इतना ही नही तमाम ऐसे शिक्षक भी है जिन्हे पहले से कार्यरत उसी न्याय पंचायत और  विद्यालयो पर मनमाने ढंग से प्रमोशन का लाभ दिया गया है. जबकि प्रमोशन मे रोस्टर प्रणाली के तहत तैनाती देने का प्रविधान है।
    कहना न होगा कि कुशीनगर जनपद मे तकरीबन 80 से अधिक शिक्षको के प्रमोशन से संबंधित मामला उच्च न्यायालय मे लंबित था। बीते मार्च माह मे उच्च न्यायालय ने शिक्षको के हित मे फैसला करते हुए इन सभी शिक्षको का प्रमोशन करने का आदेश दिया था। इसमे प्राथमिक एंव पूर्व माध्यमिक विद्यालयों मे कार्यरत शिक्षक शामिल है।

    लाँकडाउन मे प्रमोशन, बैक डेट मे कराया गया कार्यभार ग्रहण...

    शिक्षा विभाग के गलियारों मे इस बात की चर्चा सरेआम है कि न्यायालय के आदेश के बाद  जिला बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षको के प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू ही हुआ था कि कोरोना महामारी को लेकर शासन ने विद्यालय बंद करने का आदेश दे दिया। उसके बाद पूरे देश मे  लॉकडाउन  हो गया। सूत्र बताते है कि लॉकडाउन के दौरान ही बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षको को मनमाफिक विद्यालयो पर तैनाती के लिए प्रत्येक शिक्षको से पचास से एक लाख रुपये की वसूली कर बैक डेट मे प्रमोशन देकर मनचाहे विद्यालयो पर कार्यभार ग्रहण करा दिया है। सूत्रों के इस दावे मे कितनी सच्चाई है इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षको के किये गये प्रमोशन प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच जरूरी है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो सके।

    प्रमोशन मे रोस्टर प्रणाली की उडाई गई धज्जियां...

    गौरतलब है कि बेसिक शिक्षा विभाग मे शिक्षको के पदोन्नति रोस्टर प्रणाली के अन्तर्गत देने का प्रविधान है। जानकार बताते है कि प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों पर पुरुष शिक्षक जिस व्लाक मे कार्यरत रहते है उन्हे प्रमोशन के दौरान दुसरे व्लाक के विद्यालयो पर स्थानांतरित कर कार्यभार ग्रहण कराया जाता है। किन्तु कुशीनगर जनपद मे बीते माह हुए तकरीबन अस्सी से अधिक शिक्षको का पदोन्नति रोस्टर की धज्जियां उडाते हुए मनमाने ढंग से किया गया है। सूत्र कहना है कि  पदोन्नति पाने वाले तमाम ऐसे शिक्षक है जिनका न्याय पंचायत भी परिवर्तित नही हुआ है। इतना ही नही पदोन्नति मे हुई धाधली का आलम इस बात से लगाया जा सकता है कि  जो शिक्षक पूर्व मे अपने जिस विद्यालय पर सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे वह पदोन्नति लेकर उसी विद्यालय पर प्रधानाध्यापक बन गये है।

    जस के तस बने रहने के लिए शिक्षको से वसूला गया है मोटी रकम...

    विश्वस्त सूत्रों की माने तो शिक्षक को अपने पूर्व के व्लाक व न्याय पंचायतों मे पदोन्नति देने के लिए विभाग द्वारा प्रत्येक शिक्षको से पचास हजार से लेकर एक लाख रुपये वसूल किया गया है। इसमे कितनी सत्यता है यह तो उच्च स्तरीय जांच के बाद ही समाने आयेगा लेकिन यह कहना गलत नही होगा " धुआं वही उठता है जहा आग लगी होती है। ''  सूत्र बताते है कि तमकुही, पडरौना, कसया, खड्डा, कप्तानगंज, हाटा, नेबुआ_नौरंगिया सहित जिले के सभी व्लाको मे हुआ यह है कि पहले जिस व्लाक मे जो शिक्षक प्राथमिक विद्यालय या पूर्व माध्यमिक विद्यालयो मे सहायक अध्यापक के पद  पर कार्यरत है उस शिक्षक को उसी व्लाक मे ( कही कही उसी विद्यालय पर) प्रधानाध्यापक के पद पर पदोन्नति कर दिया गया है जो पुरी तरह से नियम विरुद्ध है।

    नही चस्पा किया सूची...

    जानकार बताते है कि शिक्षको के प्रमोशन की सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद विभाग द्वारा शिक्षको की व्लाकवार सूची तैयार की जाती है। उसके बाद उस सूची को  बीआरसी और जिला बेसिक कार्यालय चस्पा किया जाता है। बीआरसी और जिला बेसिक कार्यालय पर शिक्षकों की सूची चस्पा करने का उद्देश्य पारदर्शिता और शिक्षकों द्वारा किसी प्रकार की आपत्ति दर्ज करना है। लेकिन अफसोस शिक्षको से धनादोहन करने व पूर्व के व्लाको मे शिक्षको के बने रहने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के " विभाग ए-शहंशाह"  द्वारा आनन-फानन मे सारे नियम कानून की तिलांजलि देकर अपनी मनमानी का खुला प्रयोग किया गया है।

    जरुरी है उच्च स्तरीय जांच...

    बेशक कुशीनगर जनपद मे हुए शिक्षको के पदोन्नति मे अनियमितता और धनादोहन की  " बू " आ रही है ऐसे मे यहां हुए शिक्षको के प्रमोशन प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच हो जाये तो दूध का दूध, पानी का पानी साफ हो जायेगा।

    जिम्मेदार कौन?

    जैसा कि चर्चा - ए-आम है कि शिक्षको के पदोन्नति मे सारे नियम-कानून और रोस्टर प्रक्रिया को ताक पर रख विभाग द्वारा मनमानेपन और अनाधिकार का खुला प्रयोग किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है? ऐसा नही है की विभाग के उच्चधिकारी पदोन्नति के नियम-कानून और रोस्टर से अनभिज्ञ है।

    अमित कुमार सिंह
     आई एन ए न्यूज़ गोरखपुर/कुशीनगर

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