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    सावन की फुहार, सावन की शान, निराली होती है, पर आस्था की शान, सावन के महीने में, रामनगरी श्रद्धालुओं बिना सूनी

    सावन की फुहार, सावन की शान, निराली होती है,  पर  आस्था की शान, सावन के महीने में, रामनगरी श्रद्धालुओं बिना सूनी

    अयोध्या.
     अयोध्या प्रभु राम की नगरी है। जहां पर हमेशा रौनक ही रौनक रहती है। साल भर आए दिन उत्सव त्यौहार व्रत के आयोजन हुआ करते हैं। कभी रामनवमी, तो कभी कार्तिक पूर्णिमा, कभी सावन झूला मेला, तो कभी पंचकोशी या 14 कोसी परिक्रमा, जैसे महापर्व हुआ करते हैं। किंतु इस बार कोरोना संक्रमण के चलते महामारी ने ऐसा कहर ढाया है कि रामनगरी श्रद्धालुओं बिना सूनी लग रही है। कहां जाता है सावन का महीना शान का महीना होता है। एक तरफ बाबा भोलेनाथ की बम बम हर हर के नारे लगते हैं। तो वहीं सावन की रिमझिम  फुहार के बीच खेतों की हरियाली, आसमान में घेरे बादल, चारों तरफ खुशहाली ,वही दूसरी तरफ अयोध्या में सावन झूला मेला आम श्रद्धालुओं को मन मुक्त कर देता है ।

      किंतु इस साल देखा गया कि सावन के पहले दिन सोमवार का दिन सरयू तक सुना सुना तक लग रहा था नागेश्वरनाथ   छीरेश्वर नाथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, राम जन्मभूमि आदि स्थानों पर कोरोना महामारी के चलते प्रशासन द्वारा अयोध्या में प्रवेश पर रोक के कारण भक्तगण दर्शन स्नान पूजन से वंचित रह रहे हैं। आज भी मंगलवार के दिन हनुमानगढ़ी पर भक्तों की भीड़ ज्यादा नहीं पहुंच सकीं। क्योंकि बाहरी लोगों का प्रवेश अयोध्या में वंचित है ।रामनगरी में सावन की शान निराली रहती है। सावन की बरसा-बहार यूं भी मनोहारी होती है ।और रामनगरी में आस्था के ज्वार से मिलकर इसकी रौनक यादगार बन जाती है, पर इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए रामनगरी में श्रद्धालुओं का आगमन निषिद्ध कर दिया गया है।  ऐसे में रामनगरी का सावन सूना साबित हो रहा है।

     सावन का आगाज ही सोमवार से हुआ। कोई और मौका होता, तो यह संयोग आस्था के शिखर का स्पर्श करता, पर कोरोना से संक्रमित रामनगरी का सावन स्वयं में सिमट कर रह गया है। कांवड़िए थे न साधारण शिवभक्त। जिस पुण्यसलिला सरयू में प्रत्येक वर्ष सावन के साथ आस्था की हिलोर उठती रही है।, उसके घाट सूने थे। और सरयू की ओर जाने वाले घाटों पर पुलिस का सख्त पहरा था। कोराना से मुकाबिल श्रद्धालु अव्वल घर से ही निकलने में संकोच कर रहे हैं और जो हिम्मत कर निकले, उन्हें पुलिस ने रामनगरी तक पहुंचने ही नहीं दिया।

    पैदल और गोपनीय रास्तों से इक्का-दुक्कर श्रद्धालु रामनगरी पहुंचने में जरूर कामयाब हुए हैं, पर रामनगरी में उनका सफर निरापद नहीं था। सरयू ही नहीं सावन के सोमवार पर आस्था के केंद्र में रहने वाले भोले बाबा की पौराणिक पीठ नागेश्वरनाथ भी पुलिस के पहरे में रहा और यह सुनिश्चित किया जाता रहा कि इक्का-दुक्का स्थानीय श्रद्धालुओं को छोड़कर यहां भीड़ न लगने पाये। पूर्व में सावन के अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस के जो जवान श्रद्धालुओं का गहन प्रवाह नियंत्रित करने के लिए पसीना बहाते रहते थे, इस बार वे यह सुनिश्चित कर रहे थे कि सार्वजनिक स्थल पर भीड़ ही न होने पाये।

    देव बक्श वर्मा
    आई एन ए न्यूज़ अयोध्या - उत्तर प्रदेश

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