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    मानपुर गाँव में कीचड़ से लबालब मार्ग से होकर निकलने पर मजबूर हैं ग्रामीण


    मानपुर गाँव में कीचड़ से लबालब मार्ग से होकर निकलने पर मजबूर हैं ग्रामीण


    सीतापुर।  लगभग 3500 (साढ़े तीन हजार)  आबादी को अपने आंचल में समेटे विकास खण्ड बिसबाँ की ग्रामसभा मानपुर के वाशिन्दे प्रधान की निष्क्रियता के चलते इस आधुनिक युग में भी नारकीय जीवन जीने पर मजबूर हैं, यहां के ग्रामवासियों को मूलभूत सुविधाएं भी मयसर नहीं हैं, जिसके चलते अनेक विरासतों की धनी मानपुर ग्रामसभा के वासी कीचड़युक्त मार्ग पर निकलने व कोटेदार के यहां राशन लेने जाने पर विवश हैं |

    खैराबाद- बिसबाँ मार्ग पर पड़ने वाली मानपुर ग्रामसभा में कुल नौ मजरे लगते हैं परन्तु यहां की दुर्दशा देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इस गांव में जनप्रतिनिधि नाम की कोई चीज भी है | मानपुर ग्रामसभा की प्रधान जुलेखा खातून पत्नी बाबर खान हैं, पर्दानशीं होने के कारण चुनाव बाद से ही गाँव गलियारे, मजरे आदि में उनके दर्शन दुर्लभ हो गए हैं, प्रधानी का सारा काम काज प्रतिनिधि के रूप में उनके पति बाबर खान ही देखते हैं | लेकिन मानपुर की दुर्दशा देखकर ऐसा लगता है कि बाबर खान गाँव से कोई मतलब ही नहीं रखते हैं, मानपुर ग्रामसभा में दुदियापुर, दमैला, शीतलपुरवा, बल्देव नगर, अहमदपुर, गुलजारपुर, ईश्वरपुरवा एवं चौकी सहित कुल नौ मजरे लगते हैं और इन सभी गांवों के लोगों को गाँव के कोटेदार दाताराम के घर प्रत्येक माह में कम से कम दो बार राशन लेने तो जाना ही पड़ता है | 

    इसके अतिरिक्त यह मार्ग गाँव का मुख्य मार्ग होने के कारण ग्रामीण महिलाओं, बच्चों आदि का आवगमन बना रहता है, मुख्य मार्ग पर कीचड़ भरा होने के कारण आए दिन लोग गिर कर चोटिल हो जाते हैं | ग्रामवासियों ने तहसील व जिला प्रशासन से मानपुर ग्रामसभा की दुर्दशा पर ध्यान देने की मांग की है |

          शरद कपूर
             सीतापुर

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