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    मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों के अधिकारों का हनन। नहीं मिला है 47 माह से वेतन, वेतन के नाम पर मिलता है सिर्फ तो सिर्फ आश्वासन


    मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों के अधिकारों का हनन। नहीं मिला है 47 माह से वेतन, वेतन के नाम पर मिलता है सिर्फ तो सिर्फ आश्वासन 


    शाहजहांपुर।  नेशनल मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ का कहना है कि जब हम केंद्र व राज्य सरकार के समय समय पर निर्गत सारे नियमों एवं कर्तव्यों का अनुपालन करते हैं साथ ही हमारे मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों के पदो का पिछली सरकार ने ही अपने होशो हवास में सृजन किया था। तो फिर वर्तमान केंद्र व राज्य सरकारें मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों पर सौतेला व्यवहार क्यों कर रही  हैं। 

    साथ ही वर्तमान सरकारें मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों से ईर्ष्या द्वेष की भावना से परिपूर्ण कार्य कर रही है जिसका जीता जागता परिणाम यह है कि उनका 47 माह का वेतन अभी तक नहीं मिला है जिसके कारण शिक्षकों के परिवारों की दशा भुखमरी की दहलीज पर आ गई है शिक्षकों ने सैकड़ों  बार धरना प्रदर्शनों को किया है परंतु केंद्र सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है फिर केन्द्र के प्रधान सेवक का जुमला भी एक हाथ में कुरआन और एक हाथ में लैपटाप भी अपना अमली जामा नहीं पहना पाया। कहने वाले भी मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों के हितों की रक्षा नहीं कर पा रहे है।

    आखिर क्यों नहीं मिला मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों का लगभग 47 माह का बकाया वेतन।

    भुकमरी जैसी विकराल समस्या ,समाधान कोई नहीं।

    मदरसों में एक हाथ में कुरआन एक हाथ में कम्प्यूटर मोदी सरकार का यह जुमला भी अमली जामा नहीं पहन सका।

    अभी तक सेवा नियमावली नहीं।

    ज्ञात हो कि मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक आरिफ़ उस्मानी ने बताया कि लंबे अंतराल से लगभग 47 माह से मानदेय न मिलने के कारण आधुनिकीकरण शिक्षक भुखमरी की कगार पर खड़े हैं उत्तर प्रदेश में लगभग 9000 मदरसों में कार्यरत लगभग 25000 शिक्षक जो समय से मदरसे पहुंचकर बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, गणित जैसे आधुनिक विषयों की शिक्षा देते हैं यह आधुनिकीकरण शिक्षकों का दुर्भाग्य  कहिए या सरकार की मार कि इन लोगों का आज तक कभी भी समय पर वेतन नहीं मिला है।

    नेशनल मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष आरिफ उस्मानी ने बताया कि प्रदेश में कोरोना वायरस महामारी लॉक डाउन के चलते आधुनिकीकरण शिक्षकों की हालत बद से बदतर हो गई है। क्योंकि पहले मदरसे के बाद शिक्षक पार्ट टाइम कुछ कार्य कर लेते थे परंतु लाक डाउन के कारण आजकल शिक्षक घर पर ही समय व्यतीत करते हैं जिस कारण आधुनिकीकरण शिक्षक भुकमरी की कगार पर पहुंच गये हैं।

    आरिफ़ उस्मानी ने बताया कि यह केन्द्र द्वारा संचालित  स्कीम है जो मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संचालित होती है।उस्मानी ने कहा कि जब पहली बार मोदी सरकार बनी तो आधुनिकीकरण शिक्षकों ने खुशियां मनाई कि अब कुछ बड़ा होगा लेकिन हाय रे अफसोस कि आज तक ऐसा नहीं हुआ कि इस योजना से जुड़े शिक्षक अपना और अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें बल्कि वह सियासत के चक्की में गेहूं की तरह लगातार पिसते रहे।  आधुनिकीकरण शिक्षकों की समाचार पत्रों के माध्यम से भारत सरकार से यह प्रार्थना है कि पेट पर पत्थर बांधकर पढ़ाने को मजबूर मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों क 47 महा से बकाया मानदेय जल्द से जल्द जारी किया जाये और सेवा नियमावली जल्द से जल्द बनवाई जाये ताकि यह लोग भी समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें।

    आरिफ़ उस्मानी ने बताया कि मैं उत्तर प्रदेश सरकार का बहुत आभारी हूं जो मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को अतिरिक्त मानदेय राज्यांश स्नातक शिक्षक को ₹2000 प्रतिमा व परास्नातक शिक्षक को ₹3000 प्रतिमा देती है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों का दर्द  समझते हैं परंतु भारत सरकार नहीं इसीलिए भारत सरकार आधुनिकीकरण शिक्षकों का मानदेय नहीं देना चाहती।


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