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    आत्मनिर्भर से सुनहरे भविष्य की ओर, पुरातन छात्रों का योगदान


    आत्मनिर्भर से सुनहरे भविष्य की ओर, पुरातन छात्रों का योगदान


    आगरा। कोरोना संक्रमण काल 'कोवि‍ड -19' में कई  कार्य और  प्रक्रि‍याये मन्‍दन के दौर में हैं। वहीं  संयोग से इस दौर में गहन चिंतन मनन और ज़मीनी हकीक़त की पहचान के अवसर सामान्‍य स्‍थि‍ति‍यों के सापेक्ष कही सहज हुए हैं। वेवीनार के माध्‍यम से बौद्धि‍क संपन्‍न खुद तो चिंतन कर ही रहे हैं ,साथी एक दूसरे के वि‍चार भी साझा करने के मौके पा रहे हैं । इसी प्रकार का अवसर डा भीम राव अम्‍बेडकर वि‍श्‍व वि‍द्यालय के कुलपति की पहल पर उन बद्धि‍जीवि‍यों को प्राप्‍त हुआ है जो कि वि वि या उससे सम्‍बद्ध कॉलेजों के छात्र रहे हैं और तमाम महत्‍वपूर्ण पदों पर सेवाएँ देने के बावजूद वि वि का छात्र होने का अहसास अब भी रखते हैं। यही अहसास है  जो कि उन्‍हे शि‍क्षा परि‍सर की बेहतरी के लि‍ये कुछ न कुछ करने को प्रेरि‍त करता रहता है।

    सि‍वि‍ल सोसायटी ऑफ़ आगरा ने वि वि के कुलपति की इस पहल का स्‍वागत करते हुए कहा है कि छात्र जीवन में रहे अनुभवों के बाद जब युवा , नागरि‍क के रूप में जीवन जीने के लि‍ये परि‍सर से बाहर नि‍कलते हैं तो अधि‍कांश  के दि‍ल में अपने संस्‍थानों के लि‍ये कुछ न कुछ करने की स्‍वभावि‍क भावना होती है। जब इस भावना को जाग्रत रख कर कार्यरूप में अंजाम दि‍ये जाने का प्रयास नहीं होता तो इसकी तीव्रता कम होती जाती है.

    करोना काल और विश्वविद्यालय के नए कुलपति (जोकि खुद यहीं के  पूर्व छात्र हैं) की पहल पर हाल ही में एक वेबनार परिचर्चा हुई. यह एक अच्छी सोच के साथ उठाया कदम है. सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा इस का स्वागत करती है. सि‍वि‍ल सेासायटी ऑफ़ आगरा का कहना है- 1827 में  विश्वविद्यालय स्‍थापि‍त हुआ था जिस का गौरव पूर्ण इतिहास रहा है। हालांकि‍ वि‍ वि‍ 19वीं सदी में ही स्‍थापि‍त हुए देश के तीन चार वि‍श्‍ववद्यालयों मे से ही एक होता कि‍न्‍तु सुखद संयोग बीसवीं सदी के तीसरे दशक में ही बन सका। लेकि‍न बनने के साथ ही वि‍ विद्यालय ने समाज की अपेक्षाओं के अनुसार एक संस्‍था के रूप में अपना दायि‍त्‍व संभालना शुरू कर दि‍या। इसका अन्‍दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि‍ इसके गतवि‍धि‍यों के क्षेत्र में राजपूताना(मौजूदा राजस्‍थान)से लेकर कानपूर , कुमाऊं , बरेली, झाँसी, मेरठ, देहरादून, नागपुर क्षेत्र तक  के महावि‍द्यालय शामि‍ल थे। राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री, राज्यपाल ,मंत्री, न्यायाधीश, फ़ौज के अफसर, देश के सर्वोच्च नौकरशाह,डॉक्टर, शिक्षाविद, खिलाड़ी, व्यवसायी न जाने कि‍तनी  प्रख्‍यात शख्‍सि‍यते देश को दीं। खुशी की बात है कि‍ बेबनार इन्‍हीं नमाचीन हस्तियों  मे से कई को एक बार फि‍र से वि‍ वि‍ से अपने भावनात्‍मक लगाव और प्रति‍बद्धता को ताजा करने का अवसर प्रदान कर रहा है। जो कुलपति‍ जी से अपनी बात कह पाये है ,वे नि‍श्‍चि‍त रूप से स्‍वयं को गौरान्‍वि‍त महसूस करेंगे। अगर पुराने छात्रों को जोडने और उनके जुडने का सि‍लसि‍ला लगातार जारी रखा जा सका तो वह समय दूर नहीं विश्व वि‍द्यालय को हि‍त  चिंतकों को एक ऐसा समूह मि‍ल जायेगा जो कि‍ उसके कि‍सी भी प्रयास में आर्थि‍क ,वैचारि‍क, शैक्षणि‍क ,न जाने कि‍तने क्षेत्रों में सहयोग कर सकेगा।

    फि‍लहाल बहुत ज्‍यादा आशायें कि‍सी भी नये प्रयोग से लगाना उचि‍त नहीं होगा। लेकि‍न सि‍वि‍ल सोसायटी ऑफ़ आगरा ,जि‍स के ज्‍यादातर सदस्‍य डा भीम राव अम्‍बेडकर वि‍ वि‍ ( पूर्व नाम आगरा वि‍ वि)या उससे संबद्ध कॉलेजों के छात्र रहे है जानना चाहते है कि‍ पुराने छात्रों  की   विश्वविद्यालय की बेहतरी के लि‍ये क्‍या भूमि‍का है और अगर नहींं है तो उसे तय करवाया जाये. जिस से फोकस्ड योगदान लेकर लाभ लिया जा सके. सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा  का मानना है कि‍ शिक्षा जब बौद्धि‍क संपदा से संपन्‍न करने का माध्‍यम बनने के साथ ही जीवि‍कापोर्जन का स्‍थापि‍त  माध्‍यम है और वि‍ श्‍ववि‍द्यालय स्‍वयं भी कई रोज़गार परक कोर्स संचालि‍त करता है. तो ऐसे में उसे वि‍भि‍न्‍न क्षेत्रो में स्‍थापि‍त उन सभी को अपने से जोडने का प्रयास करना चाहि‍ये जो कि‍ पुरातन छात्र के रूप में वि‍ वि‍ के पास आउट फ्रेशर्स को मददगार साबि‍त हो सकें।  

    वी सी साहब को सि‍वि‍ल सोसायटी ऑफ़ आगरा  यह भी स्‍मृण करवाना चाहती है कि‍ वि‍ वि‍ में महज दो दशक पूर्व तक हॉस्टल-  छात्रों के रहने के अलग से भी कुछ कमरे , अंतरराष्ट्रीय हॉस्टल, लड़कियों के हॉस्टल, आदि‍ तमाम ढाँचागत, वे सुवि‍धाये थी जो कि‍ वि‍ वि‍ की वि‍शि‍ष्‍टता होने के साथ उसकी ख्‍याति‍ में अभि‍बृद्ध करती थी. कि‍न्‍तु एक एक करके इनमें से अधि‍कांश को योजना बद्ध तरीके से बन्‍द कर दि‍या गया।

    सबसे कष्‍टकारी है ललि‍त कला संकाय के पुराने भवन का पुन निर्माण के नाम पर ध्‍वस्‍ती करण करवा के मल्‍टी स्‍टोरी एक ऐसे कॉप्‍लैकस के स्‍वयप में बन वाना जि‍सकी जरूरत न तो वि वि को पहले कभी रही और नहीं अब है। जो हमारी जानकारी मे है कि वि  वि के प्रशासनि‍क तंत्र ने इस कांप्‍लैक्‍स का उदघाटन तो जरूर प्रदेश के राज्‍यपाल से करवा डाला  कि‍न्‍तु इसके लि‍ये न तो वि वि अनुदान आयोग से पूर्व अनुमति की जरूरत समझी गयी  और ना ही अब तक इस प्रकार की कोई अनुमति,  अगर ली जा चुकी है तो सार्वजनि‍क रूप से संज्ञान में ही नहीं लायी गयी।  जबकि सौ करोड रूपये नि‍जि महावि‍द्यालयों से मि‍लने वाले राजस्‍व का था और हॉस्‍टल या काम्‍पलैकस के नि‍र्माण में इसके व्‍यय की कोई जरूरत ही नहीं थी। दरअसल वि. वि. अपने हॉस्‍टि‍लों के निर्माण के लि‍ये वि वि‍ अनुदान आयोग से धन मांग सकता है और वह आसानी के साथ मि‍लता भी रहा है।लेकि‍न इसके लि‍ये पूर्व में कोई प्रयास ही नहीं हुआ।

    वि‍ वि‍  के समक्ष एक बडी चुनौती शिक्षण कार्य के साथ चलते रहने वाले  अनुसंधान के ठप पडे कार्य दुबारा से शुरू करवाये जाने को लेकर है।  विश्वविद्यालय के इस  मुख्य कार्य में शिथ्लता के कारण, सरकार और समाज का बहुत नुकसान हुआ है. साथ ही शिक्षक प्रशासनिक कार्य भी करते हैं। जो की सरकारी G.O और हाई कोर्ट के आदेशों की अवमानना है.

    ललित कला संस्थान और सेल्फ फाइनेंसिंग इंस्टिट्यूट वि‍ वि‍ की उपयोगि‍ता बढाने वाले साबि‍त होने  के स्‍थान पर  छवि‍ पर नाकरात्‍मक प्रभाव डालने वाले साबि‍त हो रहे हैं। इन में अपेक्षि‍त योग्यता वाले शिक्षक और पढ़ने के लिए समुचित जगह का न होना, बहुत बड़ी कमी है. इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया है. न हि पुराने और नए कुलपति महोदय ने कोई ठोस कदम लिया है। एक ओर नए कोर्स की बातें हो रही हैं पर जो कोर्स हैं उन तक को सही से चलाने का कोई प्रयास नहीं है.

    कहने को तो बहुत है, सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा ने विश्वविद्यालय से संबंधित मुद्दों को 2019 में कुलाधिपति, सचिव रूसा, सचिव उच्च शिक्षा उत्तर प्रदेश सरकार, चेयरमैन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, आदि को पत्र लिख कर अवगत कराया था.। इन नकरात्‍मकताओं में भी सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा का मानना है के “एलुमनाई एसोसिएशन” को अगर धरातल पर उत्तर कर विश्वविद्यालय की समस्याओं को समझना  होगा। इसके लि‍ये मौजूदा एलुमिनाइ एसोसि‍येशन मे बदलाव जरूरी है। बस केवल जरूरी है कि‍ उदासीन रहने वालों को ससम्‍मान वि‍दा कर उनके खाली स्‍थानों पर उन सक्रि‍य जनों को बैठा या जाये जो कि‍ कुछ करना चाहते हें। जो वर्तमान छात्रों को सर्वोपरि रख कर शिक्षा,खेल और छात्र के पर्सनालिटी विकास से यूनिवर्सिटी को आत्मनिर्भरता से सुनहरे भविष्य कि ओर ले जाने में योगदान कर सकें.  

    आईएनए न्यूज़ डेस्क
             आगरा

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