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    प्रकृति का श्रृंगार वृक्ष धरा का हार.


    प्रकृति का श्रृंगार वृक्ष धरा का हार..


    प्रकृति ईश्वर की बनाई हुई सृष्टि हैं। पेड़-पौधे ही धरती के असली श्रृंगार हैं समय समय की बात है हमे अपने बचपन का याद आता है जिधर देखते थे उधर हरा भरा दिखाई देता था। जब सडको पर चलते थे तो सड़क के दोनों ओर वृक्ष होते थे जो हमको शीतलता का आभास कराते थे। गाँव में जब जाते थे सूंदर बाग़ बगीचे और हरे भरे खेत दिखाई देते थे। आम अमरुद के बाग़ को देख कर मन बहुत खुश हो जाता था और उन्ही बागो में झूला डाल कर खूब झूलते थे और हरियाली कहिये या प्रकृति का मज़ा भरपूर लेते थे। सुबह सुबह हम बगीचे में बैठकर तरह तरह पक्षिओ की आवाज़ का आनंद लेते थे। प्रकृति हमारे जीवन के लिए बहुत आवश्यक हैं क्योकि हमारा जन जीवन इसपर निर्भर करता है। आप लेखक, पेंटर,और कलाकार की रचनाओं को देखे या सुने तो बिना प्रकृति के कुछ भी नहीं हैं।

    प्रकृति ने सभी को अपनी शक्तिओ की विशेषता प्रदान की है। बिना प्रकृति कुछ भी नहीं है जैसे समय समय पर मौसम का बदलना , दिन और रात होने पर सूर्य और चन्द्रमा का परिवर्तित होना। ये सब सृष्टि का विधान है।


    आज कल का प्रकृति के साथ जो मानव खिलबाड़ कर रहा हैं वो आज सोचने पर विवश कर रहा है। आज मनुष्य अपने भौतिक सुख साधन की प्राप्ति के लिए निरंतर बढ़ता जा रहा हैं वो शायद भूलता जा रहा है की वो अपने लिए कितना बड़ा गड्ढा खोदता जा रहा हैं। आज के दौर में मुनष्य बड़ी बड़ी बिल्डिंग, काम्प्लेक्स, बनाने के लिए दिन प्रतदिन हरे हरे पेड़ पौधों को काट काट कर प्रकति के साथ खिलबाड़ कर रहा है। जिसे हमारे देश में भू-भाग हरियाली से खाली होता जा रहा हैं। जिसके कारण पर्यायवरण हमारे जीवन के लिए एक गंभीर समस्या बनता जा रहा हैं। आज विकास की अंधी दौड़ में हम अपने पर्यावरण को पीछे छोड़ते जा रहे है जो की हम सब के लिए अति आवश्यक हैं,जैसे जैसे वृक्षों का अंधाधुंध कटान हो रहा है वही दूसरी ओर धुल धुंआ एवं रासायनिक गैसों का उत्सर्जन बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है जो हमारे लिए कैंसर जैसी अनेक बीमारी उत्पन्न भी कर रहा हैं।
    पूजनीय ही - नहीं औषधियों का भंडार भी है। पीपल का पेड़

    आज के आधुनिक युग में हम सब को अपने पूर्वजो से कुछ ज्ञान लेना चाहिए ओर समझना चाहिए की तुलसी, बरगद, पीपल, नीम, बबूल,आम , अमरुद जैसे पेड़ पौधों को धार्मिक मान्यताओ से जोड़ा हैं।बरगद, पीपल जैसे पेड़ पौधों से हमको ऑक्सीजन मिलती हैं। हम अपने आयुर्वेदा में देखे तो तुलसी, नीम, एलोविरा, गिलोय, बबूल, आमला,गुग्गल,संदल वुड,पिपरमिंट,मेहँदी, इत्यादि पेड़ पौधों का वर्णन हैं। इन पौधों से बहुत प्रकार की औषधि बनाई जाती हैं जो हमारे जीवन को स्फूर्ति देती हैं और हमारे शरीर को निरोगी बनाती हैं। आज जब ये पेड़ पौधे नहीं होंगे तो हमको न तो स्फूर्ति मिलेगी न ही हम सब निरोगी रह सकते हैं। यह पेड़ पौधे हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। प्रकृति को बढ़ाये, पेड़ पौधों को लगाए ओर जीवन को सफल बनाये।


    आज पर्यावरण दिवस पर हम सब को प्रतिज्ञा लेनी होगी की जन्म तिथि हो या किसी की भी पुण्य तिथि हमको पेड़ पौधों को लगाना है, ओर अपनी आदत में डाल ले किसी को भी पौधे के रूप में गिफ्ट दे। आज जब हम ये सोच लाएंगे तभी पर्यावरण को बचा पाएंगे।

    हरियाली सभी को सुकून देती है। पर इसको बचाने का बीड़ा कुछ ही संस्थाए पेड़ पौधों को लगाने में काम कर रही हैं। आज हम सब को एकजुट होकर ये मुहीम को बढ़ाना है देश को फिर से हरा भरा बनाना है।

    "साँसे हो रही कम, आओ पेड़ पौधे लगाए हम"

         पूनम सिंह
         सब एडिटर
    आईएनए न्यूज़ एजेंसी

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