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    पर्यावरण हमारे जीवन का अभिन्न अंग है, इसके बिना हमारे अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती....


    पर्यावरण हमारे जीवन का अभिन्न अंग है, इसके बिना हमारे अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती....


    कहते हैं मनुष्य का शरीर पंच तत्वों से मिलकर बनता है। पर्यावरण हमारे जीवन का अभिन्न अंग है इसके बिना  हमारे अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हम मनुष्य इतने स्वार्थी हो गए हैं कि पर्यावरण का लगातार शोषण करते आए हैं। यह जगत और मानव जीवन पारस्परिक आदान-प्रदान पर चल रहे हैं। परस्पर समन्वय ही सृष्टि की रचना और उसके संचालन का महत्वपूर्ण कारक है। ऐसे में प्रकृति के संसाधनों का मनुष्य द्वारा लगातार दोहन प्रथ्वी के अस्तित्व के लिए खतरा बन रहा है। पृथ्वी पर उपस्थित सभी पेड़ पौधे, नदियां ,पहाड़ ,पशु पक्षी, हवा और सूर्य ये सब वे कारक हैं जो हमारी जीवन ऊर्जा को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते हैं । इनमें से एक का भी लुप्त होना हमारे जीवन पर असर डाल सकता है। हम भाग्यशाली हैं कि हमने उस देश में जन्म लिया है जहां प्राकृतिक सौंदर्य प्रचुर मात्रा में है । जहां पेड़- पौधों और पशु- पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं।  समय के साथ और विकास के क्रम में इनमें से बहुत सी प्रजातियां लुप्त हो चुकी हैं लेकिन जो बची हैं हमें उनका संरक्षण करना है।  

    वर्तमान समय में पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है। कोरोना के कारण पूरे विश्व भर में बहुत सी मौतें हुई हैं और लाखों लोग इस बीमारी से ग्रसित हुए हैं। लेकिन प्रकृति पर इसका प्रभाव बहुत ही आश्चर्यजनक है। फैक्ट्रियों और वाहन आदि के बंद होने से और मनुष्यों के घर में रहने से प्राकृतिक जीव-जंतुओं और वातावरण में अद्भुत परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं । वायु पहले से कहीं स्वच्छ और निर्मल हो गई है । शहरी क्षेत्रों के आसपास वन्य क्षेत्रों में अब पशु -पक्षी निर्भीक रूप से विचरण करते दिखाई दे रहे हैं जो पहले दिखाई नहीं देते थे । निश्चित रूप से इसका लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक  प्रभाव देखने को मिलेगा। शुद्ध वायु से लोगों का स्वास्थ्य निश्चित रूप से बेहतर होगा। इस के आने वाले समय में अवश्य ही कुछ सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे ।

    2 दिन पहले केरल में एक  गर्भिणी हथिनी को विस्फोटक पदार्थों के साथ अनानास खिलाने की घटना सामने आई है जो बहुत ही निंदनीय है। जीव जंतुओं के प्रति इस निर्ममता का हमें विरोध करना होगा । हमारे देश के अधिकांश संप्रदाय जीवो के प्रति दया का भाव रखने का संदेश देते हैं। विश्व में एकमात्र भारत ही ऐसा देश है जिसने शाकाहार को जीवन पद्धति के रूप में स्वीकार किया है। 

    आइए हम संकल्प लें कि मनुष्य और प्रकृति के परस्पर संतुलन को बनाए रखकर इस पृथ्वी को और सुंदर बनाने का बनाने का प्रयास करें। हम पर्यावरण के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें और दायित्वों की पूर्ति करें । 

    अपने घर और उसके आसपास वृक्षारोपण कीजिए और दूसरों को भी करने को प्रेरित कीजिए। 

    नॉन बायोडिग्रेडेबल पदार्थों का कम से कम प्रयोग करें ।

    अधिक से अधिक ऑर्गेनिक वस्तुओं को इस्तेमाल में लाएं। पॉलिथीन और खाने-पीने में प्रयोग होने वाले डिस्पोजेबल कंटेनर्स का पूरी तरह बहिष्कार करें। 

    सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः इसी कामना के साथ विश्व पर्यावरण दिवस की आप सभी को शुभकामनाएं ।

    भावना वरदान शर्मा 
    लेखिका, कॉलमिस्ट, सोशल एक्टिविस्ट

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