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    जागरूकता: नंदिनी और हर्ष ने लॉकडाउन का किया सदुपयोग, बना डाले हज़ारों मास्क व कपड़े के थैले


    जागरूकता: नंदिनी और हर्ष ने लॉकडाउन का किया सदुपयोग, बना डाले हज़ारों मास्क व कपड़े के थैले


    पॉलीथिन का प्रयोग ना करने के लिए चलाई हुई है दो वर्षों से मुहिम

    रेवाड़ी।  सिंगल यूज़ पॉलीथिन पर पीएम मोदी द्वारा 2 अक्टूबर 2019 को पूर्णतः बैन कर दिया गया है। लेकिन पिछले दो वर्षों से रेवाड़ी की बेटी नंदिनी व उसके छोटे भाई हर्ष ने लोगों को पॉलीथिन का इस्तेमाल ना करने के लिए जागरूक कर रहें है। 

    रेवाड़ी के मोहल्ला विकास नगर निवासी 12वीं कक्षा की छात्रा नंदिनी व 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले हर्ष ने पीएम मोदी के सिंगल यूज़ पॉलीथिन बैन के क़रीब दो वर्ष पहले से ही पॉलीथिन का इस्तेमाल ना करने के लिए लोगों को कपड़े के थैलों का प्रयोग करने के लिए जागरूक कर रहें है। आपको बता दें कि यह दोनों बच्चे को स्कूल के बाद जो समय खेलने के लिए मिलता था उस समय में यह बच्चे कपड़े के थैले बनाते है। जो जेब खर्ची इन बच्चों को मिलती थी उसी से यह थैले बनाने के लिए कपड़ा बाज़ार से ख़रीदते है। अब तक यह बच्चे हजारों कपडे के थैले बनाकर लोगों को निःशुल्क भेंट कर चुके है। 

    कोरोना वायरस के ख़तरे को देखते हुए देशभर में लगे लॉकडाउन के बाद लोग अपना समय व्यतीत नही कर पा रहे थे। लेकिन नंदिनी और हर्ष ने लॉकडाउन में समय का ठीक से सदुपयोग किया और घर पर ही रहकर कपड़े के हज़ारों थैले बनाएं साथ ही उन्होंने कोरोना से लड़ने के लिए मास्क भी तैयार कर लोगों में बांटे गए। 
    नंदिनी और हर्ष दोनों छात्रों ने लॉकडाउन की ठीक से अनुपालना की और घर पर रहकर हज़ारों थैले बनाएं ताकि पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जाए। 

    नंदिनी ने बताया कि लोगों को कपड़े से बने थैलों का इस्तेमाल करना चाहिए। पॉलीथिन से पर्यावण दूषित होता है, जो मनुष्य की सेहत के लिए हानिकारक होता है। कोरोना वायरस भी प्लास्टिक पर ज़्यादा समय तक जिंदा रहता है, और कपड़े पर कुछ समय के लिए ही रहता है। इसलिए लोगों को कपड़े से बने थैलों का इस्तेमाल करना चाहिए। 

    महेंद्र भारती

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