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    जानजोखिम में डाल कर कोसी नदी पार करा रहे है ग्रामीण


    जानजोखिम में डाल कर कोसी नदी पार करा रहे है ग्रामीण


    रामपुर। यूपी के रामपुर में चन्द पेसो के लिए ग्रामीण कोसी नदी से बाइके ओर लोगो को गहरे पानी से गुज़र का पार करा रहे है जिसमे कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है। आप इन तस्वीरों में साफ देख सकते हो कैसे ग्रामीण अपने गन्धो पर बच्चो व लोगो को पानी से नदी पार करा रहे है यही नही बाइक बेल गाड़ी में सवारी लेकर जन जोखिम में डाल कर कोसी नदी पार कराया जा रहा है। और ज़िला प्रशासन जान कर भी अनजान बना है, शायद प्रशासन कोई बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है। 

    मामला रामपुर के लालपुर गांव का है जहाँ अस्थायी पुल हटने के बाद कोसी नदी के आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है। टांडा से रामपुर आने-जाने वाले लोगों को बैलगाड़ी से नदी पार करनी पड़ रही है। इसके बदले में उनको पैसे भी देने पड़ रहे हैं। बैलगाड़ी से बाइक को पार कराने का 50 रुपये और प्रति व्यक्ति 20 रुपये लिए जा रहे हैं। लोग भी अधिक दूरी तय करने से बचने के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं।

    कोसी नदी पर नवाबी दौर में लोहे का पुल बनाया गया था। तब उस समय के हिसाब से पुल आवागमन के लिए सही था, लेकिन गुजरते दिनों के साथ आबादी बढ़ गई। ऐसे में छोटा पुल होने की वजह से यह पुल नाकाफी था। एक बार में दोनों तरफ से चार पहिया वाहन तक नहीं निकल पाते थे, जिस वजह से कई बार तो जाम के हालात बन जाते थे। वहीं, वर्षों पहले बना यह पुल जर्जर हो चुका था, जिसके बाद 2016 में नवाबी दौर के पुल को तोड़ दिया गया और नए पुल के निर्माण की कवायद शुरू हुई। 315 करोड़ रुपये की लागत के इस प्रोजेक्ट के लिए शासन ने तब 128 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे। यह धन खर्च हो चुका है, जिससे कोसी नदी में पिलर आदि बनकर तैयार हो गए हैं, लेकिन शेष धन न मिलने की वजह से आगे का काम रुका हुआ है। ऐसे में लकड़ी का अस्थायी पुल बनाकर लोगों के आवागमन की व्यवस्था की गई थी, जिससे लोग आते और जाते थे। लेकिन, बरसात से पहले ही अस्थायी पुल को हटा दिया गया है।

    ऐसे में रामपुर से टांडा तहसील का संपर्क पूरी तरह से कट गया है। सबसे ज्यादा दिक्कत व्यापारियों और किसानों को हो रही है, लेकिन अधिक दूरी और समय की बचत करने के लिए लोग अब भी जान जोखिम में डालकर नदी को पार करने को मजबूर हैं। पुल के मुद्दे पर राजनीति करने वाले चुप बैठे हुए हैं। 
    नमक को जगह-जगह दुकानों तक पहुंचाना होता है, लेकिन पुल हटने की वजह से दिक्कत हो रही है। यदि इसी रास्ते से जाएं, तो नदी पार कराने के पैसे भी अधिक देने पड़ते हैं। जान का खतरा सो अलग। दूसरे रास्ते से जाएं तो दूरी अधिक तय करनी होती है। आखिर हमारी समस्या का समाधान कैसे हो? -मैराज मुंशी, नमक के थोक व्यापारी।
    हम लोगों को आज किसी पंचायत के लिए आना था। यहां आए तो पुल टूटा मिला और नदी पार करने के भी अलग से रुपये देने पड़े। वहीं, नदी पार करने के लिए काफी देर तक इंतजार भी करना पड़ा। हर साल की यही दिक्कत है। ऐसे में इस समस्या के स्थायी निदान के लिए पुल का निर्माण जल्द पूरा हो। -सलामत अली, टांडा बादली।
    टांडा से चावल लेकर आते हैं और गांव-गांव फेरी लगातार बेचते हैं। लेकिन, अब पुल न होने की वजह से काफी परेशानी होगी। दूसरे रास्तों से आना पड़ेगा, जिससे समय और पैसे भी अधिक खर्च होंगे, जबकि चावल की बिक्री पुराने रेट पर ही होगी। इस समस्या को दूर कराया जाना चाहिए। -ताज मोहम्मद, खसिया कुंडा टांडा।
    खेती बाड़ी के कामकाज से अक्सर रामपुर आना जाना रहता है, लेकिन आज आए तो पुल नहीं मिला। नदी पार करने के लिए लोग पैसे मांग रहे थे। ऐेसे में मायूसी के साथ वापस लौटना पड़ा। इससे हमारी दिक्कतें तो बढ़ गई हैं। सरकार को चाहिए कि वह हमारी परेशानी समझें और पुल का शीघ्र ही निर्माण हो। -रियासत अली, मंगावाला टांडा।
    कोसी नदी स्थित अस्थायी पुल के जरिए लोगों का आवागमन था। अब बरसात का मौसम आ रहा है। ऐसे में कोसी नदी में पानी आएगा तो नुकसान हो सकता है। लोगों की सुरक्षा के लिहाज से ही अस्थायी पुल हटाया गया है। लोगों को नदी पार कराने के लिए वसूली की जानकारी नहीं है। ऐसी कोई बात है तो कार्रवाई की जाएगी।

    हारून पाशा

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