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    आखिर कब खत्म होगी प्रवासी मजदूरों के साथ सितम की यह दास्तां


    आखिर कब खत्म होगी प्रवासी मजदूरों के साथ सितम की यह दास्तां


    करनाल ।  करनाल रेलवे स्टेशन पर बैठे एक प्रवासी मजदूर और उसके 7 बच्चों को रेलवे के कर्मचारियों ने खाना खिलाया फिर प्रशासन को बुलाया गया उसके बाद उन्हें शेल्टर होम पहुंचाया गया। प्रवासी मजदूर करनाल में एक जमीदार के पास काम करता था लेकिन प्रवासी मजदूर वहा से परेशान होकर भाग आया,। प्रवासी मजदूर पटना का रहने वाला है। 

    ये छोटे छोटे 7 बच्चे , उनका एक पिता , जिसके चेहरे पर चोट के निशान। बच्चों की माँ भी इनके साथ नहीं है, दरसअल ये पटना के रहने वाला प्रवासी मजदूर करनाल में जमीदार के पास काम करता था, प्रवासी मजदूर का आरोप है कि उसने इसके मारपीट भी की। जो मजदूर और उसके बच्चों के पास जो छत थी वो भी छिन गई, मदद लेते लेते किसी तरह अपने बच्चों के साथ ये मजदूर करनाल रेलवे स्टेशन पहुंचा, वहां पर रेलवे के कर्मचारियों ने इन्हें एक छत के नीचे बिठाया ताकि बारिश में भीगे ना। फिर इनको बिस्किट दिए गए, इनके लिए घर से खाना बनवाया गया, सुबह से भूखे बच्चों ने खाना खाया और राहत की सांस ली। अब समस्या थी कि रात कैसे गुजरेगी। प्रशासन को मौके पर बुलाया गया और तहसीलदार मौके पर पहुंचे , इन सभी सातों बच्चों और उनके पिता को प्रशासन की गाड़ी में बैठाकर राधा स्वामी सत्संग घर शेल्टर होम भिजवाया गया ताकि इनके रहने की व्यवस्था की जा सके। बच्चों को उनके घर पटना भेजने का इंतजाम भी प्रशासन की तरफ से किया जाएगा।

    बच्चों और उनके पिता के लिए रहने की व्यवस्था तो हो गई लेकिन ऐसी मुश्किल की घड़ी में उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी जो प्रवासी मजदूरों को अपने घर से बाहर निकाल रहें क्योंकि जब उन्हें ज़रूरत थी तब इनसे काम करवाया और अब इनके ऊपर लॉक डाउन में मुसीबत का पहाड़ टूटा है तो इनका साथ छोड़ दिया। 

    राकेश भारतीय

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