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    कानपुर में लॉक डाउन ने कराई अनोखी शादी

    कानपुर में लॉक डाउन ने कराई अनोखी शादी



    फुटपाथ पर राहत बाटने के दौरान रोजाना खाना  लेने वाली लड़की से ही युवक को हो गया प्यार

    (अपने परिवार को समझाकर कर बना लिया दुल्हन, कई संभ्रांत लोगो की मौजूदगी में हुई शादी)

    कानपुर। समय चक्र की चाल सचमुच कब क्या गुल खिला दे पता ही नहीं चलता लॉक डाउन की बंदिशों के चलते जहा एक तरफ  देश में हजारो लोगो ने अपनी शादी की डेट टाल दी वही कानपूर में इसी लॉक डाउन ने एक गरीब लाचार अनाथ लड़की  की वजह से शादी हो गई   गरीबी की वजह  से फुटपाथ पर  भिखारियों के साथ बैठी  इस लड़की को जो युवक खाना बाटने आ रहा था उसी युवक ने उसकी मांग भरकर उसे अपनी  दुल्हन बना लीया  सामजिक सोच बदलने वाली   इस शादी को जिसने भी सूना    सिर्फ वह वह ही कर रहा है 

    कानपूर के बुध आश्रम में  नीलम से शादी रचाते अनिल को तो शायद सपने में भी कभी ये गुमान नहीं रहा होगा की लॉक डाउन में वह फुटपाथ पर जिस नीलम को भिखारियों के साथ खाने की राहत बाट रहा है  वह एक दिन  इस तरह उससे शादी  की वरमाला पहनायेगा  निलिम के पिता नहीं है माँ पैरालेसिस से पीड़ित है भाई भाभी ने मारपीट कर घर से भगा दिया था नीलम के पास गुजारा करने को कुछ था इसलिए वह लॉक डाउन में खाना लेने के लिए फुटपाथ पर भिखारियों के साथ खाने के लाइन में बैठती थी अनिल अपने मालिक के साथ रोज सबको  खाना देने आता था इसी दौरान अनिल को जब नीलम की मजबूरियों का पता चला तो उसे उससे प्यार हो गया फिर क्या  भिखारी की लाइन निकलकर नीलम उसके सात जन्मो की हमसफ़र बन गई  नीलम को तो अभी तक अपनी शादी को लेकर सपने में खोई सी है  जबकि अनिल अपनी शादी को लॉक डाउन की शादी का नाम दे रहा है 

    बाइट अनिल दूल्हा  लॉक डाउन में खाना दने जाते थे इनकेपिता नहीं थे बातचीत में पता चला फिर प्यार हो गया मालिक को बताया पापा भी राजी हो गए शादी हो गई  ये लॉक डाउन की शादी है 

    बाइट नीलम  फुटपाथ की जिंदगी घर की दुल्हन   सोचा नहीं था की शादी होगी  सब ऊपर वाले का कर्म है।

    अनिल एक प्रापर्टी डीलर के यहाँ ड्राइवर है उसका अपना घर है माता पिता भाई सब है जबकि नीलम की जिंदगी फुटपाथ पर माँग जांचकर  चलती थी उसे तो ये उम्मीद ही नहीं थी की कोई उससे भी शादी कर सकता है  अब ये सब उसे उपरवाले का करम ही लगता है वैसे इस शादी को ुक़ाम तक पहुंचाने में अनिल के मालिक लालता प्रसाद का सबसे बड़ा योगदान है अनिल जब दिन में खाना बाटकर आता था तो नीलम की चर्चा  उनसे करता था लालता जी की भावना समझ गए उन्होंने उससे समझाया दिन में  खाना तो तुम उसे दे आते हो  रात में क्या खायेगी इसके बाद अनिल रात में खुद खाना बनाकर कई दिनों तक नीलम को देने जाने लगा इसके बाद लालता प्रसाद ने अनिल के पिता को शादी के लिए राजी किया  और वरमाला   की मंजिल तक दोनों को पहुंचा दिया   बुधवार को  भगवान् बुध आश्रम में नीलम की बेजान दुनिया आबाद हो गई इस शादी में सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए कई सामजिक लोगो ने  शामिल होकर वरवधू को आश्रीवाद दिया।

    बाइट लालता प्रसाद  प्रॉपर्टी डीलर शादी करवाने वाले    ये खाना बाटने हमारे साथ जाता था फिर उसे लगाव हो गया मुझसे चर्चा की तो मैंने इससे उसको रात में भी खाना देने को कहा अनिल खुद   खाना बनाकर देने जाने लगा इसके बाद मैंने अनिल के पिता को राजी किया फिर दोनों की शादी करवा दी भगवान् बुध की कृपा से दोनों बेटा बेटी खुश है।

     वैसे तो हर शादी जिंदगी का खूबसूरत अहसास लेकर आती है लेकिन कभी कभी कोई शादी ऐसी पटकथा लेकर सामने आती है जिससे यही महसूस  होता है की शादिया शायद जिंदगी को रचने वाले खुदा की फ़िल्म का ही एक मंचन होता है वह पहले से तय कर रखता किसको किसके जन्मो का साथी बनना है कम से कम अनिल और नीलम की शादी की कहानी तो यही दर्शाती है।

    इब्ने हसन ज़ैदी

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