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    मस्जिदों के बजाय घरों में ही पढ़ें नामाज


    मस्जिदों के बजाय घरों में ही पढ़ें नामाज

    देवबन्द। दारुल उलूम ने फतवा जारी कर कहा है कि लाकडाउन के चलते घरों में ही नमाज पढ़ी जाए। लॉक डाउन में भी ईद की नमाज की वही शर्ते रहेंगी । नमाज ईदगाह और मसजिदों में नहीं करके अपने घरों के हिस्सें में ही ईद की नमाज करने या जमात की शक्ल ना होने पर चाश्त की नमाज ए-नफ्ल अदा करने को कहा है। दारुल उलूम के फतवा विभाग ने संस्था के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी के सवाल जवाब में दिया है।
    माह-ए-रमजान के रोजो के बाद दो रकआत नमाज-ए-ईद अदा कर रोजेदार अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं। 


    इस बार माह-ए-रमजान कोरोना संक्रमण के चलते लॉक डाउन में ही बीत रहा है। अब चंद दिनों में ईद आ रही है। ईद की नमाज को लेकर रोजेदारों की बैचेनी देखते हुए दारुल उलूम मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने संस्था के मुफ्ती-ए-कराम से नमाज-ए-ईद के लिए सवाल किया तो संस्था की मुफ्ती-ए-कराम की खंडपीठ ने सवाल के जवाब पर फतवा जारी करते हुए कहा कि ईद-उल-फितर की नमाज वाजिब है। इसलिए इसे पढ़ना आवश्यक है। मुफ्ती महमूदउल हसन बुलंदशहरी के नेतृत्व की खंडपीठ में शामिल मुफ्ती हबीबुर्रहमान खैराबादी, मुफ्ती वकार अली, मुफ्ती नौमान सीतापुरी, मुफ्ती जैनूल इस्लाम और मुफ्ती फखरुल इस्लाम की खंडपीठ ने जारी फतवे में कहा कि ईद की नमाज तक लॉक डाउन जारी रहने की सूरत में जिस तरह लॉक डाउन में नमाज-ए-जुमा शासन-प्रशासन के निर्देशानुसार मस्जिद या घरों में (पांच-पांच लोगों द्वारा)अदा की जा सकती है। साथ ही फतवे में सलाह देते हुए कहा कि जो लोग किसी मजबूरी के तहत ईद की नमाज अदा नहीं कर पाएंगे, उनके लिए नमाज-ए-ईद माफ होगी। मुफ्ती-ए-कराम ने कहा कि अगर ईद-उल-फितर की नमाज अदा करने में जमात का प्रबंध नहीं हो पाता तो अपने ही घरों में रहकर दो या चार रकाअत नमाज-ए-नफल चाश्त की अदा करना बेहतर है।

    शिबली इक़बाल 
    आई एन ए न्यू  सहारनपुर उत्तर प्रदेश


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