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    मेक इन इंडिया को मिलेगी रफ्तार



    मेक इन इंडिया को मिलेगी रफ्तार 

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए देशवासियों से  आह्वान किया है कि अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी प्रोडेक्ट्स उपयोग करें। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के नाम सम्बोधित करते हुए 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की। और इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को समर्पित किया।प्रत्यक्ष रूप से यह पैकेज भारतीय उद्योग जगत को तौहफा रहा है। इस बीच किसान और ग्रामीण दिहाड़ी मजदूर के बारे में भी गहराई से सोचना था। बहरहाल पभारतीय नागरिकों से स्वदेशी प्रोडेक्ट खरीदने, उपभोग करने व उनका प्रचार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ये देशी प्रोडक्ट ही लोकल से ग्लोबल प्रोडक्ट बनेंगे। 130 करोड़ देशवासियों मिलकर 21वीं सदी को भारत की सदी बनाना है। देश में उपलब्ध कौशल की पूंजी से ही आत्मनिर्भर भारत बनेगा। 


           संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का ध्यान स्वदेशी पर अधिक था। इससे यह बात साफ होती है कि देश की स्वयं की संपत्ति व स्वयं के बाजार से आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य है। इससे पहले 17 अप्रैल को मोदी सरकार ने एफडीआई के नियमों में बदलाव करते हुए, तथा किसी देश का नाम लिए बिना कहां की अब विदेशी निवेश के लिए भारत सरकार की मंजूरी आवश्यक है। इसके तहत ऐसा देश जिसकी स्थलीय सीमा भारत से लगती हो वहां की कंपनी भारत में बिना सरकारी मंजूरी के निवेश नहीं कर सकती। अगर किसी निवेश का लाभार्थी व्यक्ति किसी ऐसे देश में रहता हो या उस देश का नागरिक हो, तो भी यही नियम लागू होगा। इसके अलावा चीन की कंपनियों द्वारा प्रत्यक्ष अधिग्रहण पर भी रोक लगा दी है। अब चीन के द्वारा भारत में किए जाने वाले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी निवेश के लिए सरकार से मंजूरी लेनी होगी। इससे पहले यह नियम बांग्लादेश और पाकिस्तान की कंपनियों पर लागू था। आपको बता दें कि वर्तमान में चीन ने भारत में 61 हजार करोड़ का निवेश कर रखा है। यह मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक संसाधन, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल आदि क्षेत्रों में है। 
           जहां तक स्वदेशी प्रोडक्ट के उपयोग उपभोग की बात है तो निश्चित ही देश के ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार मिलेगा। देश की प्रतिभाओं व कौशल का सही उपयोग हो पाएगा। युवाओं को मोबाइल व ऑटोमोबाईल क्षेत्रों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में अपना भविष्य बनाने हेतु स्वदेशी रास्ते मिलेंगे। इससे पहले हम अपनी दिनचर्याओं में विदेशी उत्पादों का उपयोग करते करते उनकी मानसिकता से घिर गए थे। विदेशी उत्पाद सस्ते व सुलभ होने से हमने इन्हें अपने जीवन के मजबूत स्तम्भ बना दिए थे। अब जाकर प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान है तो निश्चित ही देश में परिवर्तन की लहर आएगी। 
         ऐसे कई स्वदेशी उत्पाद है जिनका हम दैनिक जीवन में उपयोग कर रहे हैं और भविष्य में भी विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करके स्वदेशी वस्तुओं का उपभोग उपयोग करना होगा। देश की मजबूती इसी में निहित है। अन्य सीमवर्ती देशों के मानसिकता व अधिग्रहण प्रवृति को हम आसानी से नकार सकेंगे। कुछ स्वदेशी उत्पादों को सूचीबद्ध करने की कोशिश की है फिर भी कुछ उत्पाद पर असमंजस होना स्वाभाविक है। जैसे नहाने के साबुन से संबंधित गोदरेज, संतूर, निरमा, मैसूर सैंडल किप्रो शिकाकाई, मेडिमिक्स, सिंथाल, नीमा आदि हैं। कपड़े धोने का साबुन से संबंधित उत्पाद स्वास्तिक, ससा, प्लस, निरमा, विमल, हिपोलिन, डेट, फेना, उजाला, इजी, घड़ी, जेंटिल, आरती, दो कैंची, स्वराज, वैंगस आदि हैं। सौंदर्य प्रसाधन औषधि से संबंधित पार्क एवेन्यू, सिंथाल, संतूर, इमामी, बोरोप्लस, तुलसी, विको टर्मरिक, हेयर एंड केयर, हिमानी, पैराशूट, डाबर, झंडू, सांडू, वैद्यनाथ, हिमालय, बारोलीन, बजाज, सेवाश्रम, क्रैक क्रीम, अयूर आदि हैं। टूथपेस्ट दंतमंजन टूथब्रश से संबंधित बबूल, प्रोमिस, विको, एंकर, डाबर, मिस्वाक, अजंता, वैद्यनाथ, इमामी, हिमालय, दंतकांति आदि हैं। शेविंग साबुन ब्लैड्स से संबंधित गोदरेज, इमामी, सुपर, सुपरमैक्स, वी-जॉन, टोपाज, पार्क एवेन्यू आदि हैं। बिस्किट, चॉकलेट व दुग्ध उत्पादन से संबंधित शालीमार, पैरी, रावलगांव, क्लासिक, अमूल, न्यूट्रामूल, सफल, वेरका, सागर, प्रिया गोल्ड, न्यूट्रीन, वीटा, मदर डेयरी, क्रीमीका, राजा, सनफीस्ट, पार्ले, फर्नीटियर, महालक्ष्मी, हल्दीराम, बीकानो आदि हैं। चाय कॉफी से संबंधित टाटा टी, आसाम टी, डंकन, ब्रह्मपुत्र, टिपस, तेज, टाटा कैफे, टाटा टेटली, वाघबकरी, ऑर्गेनिक, इंडिया आदि हैं। शीतपेय, चटनी, अचार व मुरब्बा से संबंधित एनर्जी, कैपिकोला जाम्पिन, फ्रूटी, डाबर, रसना, हमदर्द, रूह-अाफजा, हल्दीराम, गोकुल, बीकानेर, प्रिया, अशोक, मदर्स, रियल जूस आदि है।  पीने के पानी में बैली, नेचुरल, रेलनीर आदि हैं। आइसक्रीम से संबंधित दिनशॉ, वाडीलाल, अमूल, हिमालय, निरूला, मदर डेयरी, हैव मोर, वेरका, वीटा, क्रीम बेल, प्रीतम, बादशाह आदि हैं। खाद्य तेल एवं खाद्य पदार्थ से संबंधित सनफ्लावर, मारुति, पोस्टमैन, धारा, गिन्नी, स्वीकार, सनड्राप, रथ, पैराशूट, अशोक, सफोला, गगन, अमृत, वनस्पति, रामदेव, एमडीएच, एवरेस्ट, डाबर, लिज्जत, शक्ति भोग आटा, टाटा नमक, एमटीआर, हल्दीराम, बिकानो, महालक्ष्मी आदि हैं। विद्युत उपकरण एवं गृह उपयोगी वस्तुओं से संबंधित वीडियोकॉन बीपीएल, ओनिडा, सलोरा, टी सीरीज, वेस्टर्न, टीसीएल, गोदरेज, बजाज, ऊषा, पोलर, एंकर, सूर्या,ओरियंट, क्रॉन्पटन, लायड्स, ब्लूस्टार, वोल्टास, खेतान, एवरडेडी, जिप, नोविनो, सुमित, हॉकिंस, प्रेस्टीज, महाराजा, प्रेशर कुकर, सुजाता मिक्सी आदि हैं। घड़ी से संबंधित टाइटन, अजंता, एचएमटी, मैक्सिमा, फास्टट्रैक आदि। जूते चप्पल से संबंधित लखानी, लिबर्टी, एक्शन, पेरागॉन, रिलैक्सो, रेड टेप, किवी शू पॉलिश आदि। लेखन सामग्री से संबंधित विल्सन, कैमलिन, रोटोमेक, सेलो, स्टिक, मॉन्टेक्स, कैमल, अप्सरा, लिंक, बिल्ट आदि हैं। रेडीमेड गारमेंट से संबंधित मफतलाल, अमूल, वीआईपी, रूपा, रेमण्ड, ग्रासिम, पार्क एवेन्यू, आदि भारत में ब्रांड हैं।

     अरविन्द सुथार, 
    वरिष्ठ कृषि एवं पर्यावरण लेखक, जालौर। 


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