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    लॉक डाउन समय में ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली का प्रभाव



    लॉक डाउन समय में ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली का प्रभाव

    आज कल शिक्षा प्रणाली मानव जाति की सेवा नहीं कर रही है, सिर्फ उद्योग और कारोबार जगत की सेवा कर रही है। आज कल वैश्विक महामारी में सबसे बड़ी समस्या बच्चो की पढ़ाई-लिखाई की है। जब से लॉक डाउन हुआ है तब से सारे स्कूल में ऑनलाइन क्लासेज का प्रावधान बड़े जोर सोर से होने लगा है या ये कहिये कि स्कूल वालो को सिर्फ अपना टारगेट पूरा करना है जिससे वो अभिभावक से फीस ले सके और टीचर्स को पेमेंट्स कर दे। 


    ऑनलाइन क्लास कितनी प्रभाव शाली हो सकती* है। आप ऐसे समझिये क्लास 1 से 8 तक का स्टूडेंट्स जो अभी तक क्लास रूम में क्लास ले रहा था। वहां पर वो भावनात्मक,रचनात्मक, कलात्मक व मनोवैज्ञानिक दृष्टि से जुड़ा होता हैं और एक कॉम्पिटशन का भी प्रभाव भी रहता है।ऑनलाइन क्लास में आप पर कोई दवाव नहीं हैं कि आप क्लास कर रहे हो या नही,हर स्टूडेंट्स एक जैसा नहीं होता हैं। 


    कुछ स्टूडेंट्स आज कि ऑनलाइन क्लास न करने के लिए बहुत से बहाने भी करते है। जरुरी नहीं कि हर अभिभावक के पास बहुत स्मार्ट फ़ोन हो जिससे वो अपनी जॉब को भी संभाल सके और अपने बच्चो कि ऑनलाइन क्लास भी करा सके। आज कोरोना वायरस काल में सब कुछ लॉक डाउन हैं तो सारे काम स्मार्ट फ़ोन पर ही आधारित हो गए है ऐसे समय मैं हर जगह नेट कि कनेक्टिविटी मिले और स्टूडेंट्स को क्लास होती रहे चाहे स्टूडेंट्स कुछ समझ में आये या नहीं, ऐसे में स्कूल वाले भेड़ चाल मैं ढोंग किये जा रहे है। आज वैश्विक महामारी में लोग सुरक्षित रहेंगे तो साल भर की पढ़ाई 6 महीने में ही पूरी की जा सकती हैं। 


    आज कल के स्कूल के संचालक अगर अपना नया सेशन जुलाई या सितम्बर से प्रारम्भ करेंगे तब भी अच्छे से पढ़ाई हो जाएगी।आज कल ऑनलाइन क्लासेज में लगी होड़ में स्टूडेंट्स और उनके अभिभावक दोनों के लिए एक बहुत बड़ी परेशानी बनी हुई है।आज कल अभिभावक दोनों वर्किंग में होते है तो वो अपना ऑफिस का काम देखे या बच्चो कि ३-४ घंटे वाली ऑनलाइन क्लासेज। 


    आज के अभिभावक में खास कर माँ पर एक इतनी बड़ी जिम्मेदारी आगयी हैं कि इस वैश्विक महामारी में घर को सुरक्षित रखे और हर चीज़ पर ध्यान रखे और उसके साथ हो रही ऑनलाइन क्लास्सेस में बच्चो के साथ बैठ कर क्लासेज कराये और फिर बच्चो का होम वर्क भी कराये। ऐसे हो रहे ऑनलाइन क्लास्सेस में बच्चों की रचनात्मक क्षमता में कमी आएगी ।और वो एकदम कंप्यूटर या मोबाइल में आधारित हो जायेंगे।

    आज कल स्टूडेंट्स जब मोबाइल और कंप्यूटर पर ज्यादा आधारित होंगे तो उसकी आँखों पर असर होगा और बुद्धि एक दायरे में ही सीमित हो जाएगी। जिससे उसकी प्रतिभा का भी हनन होगा।

    आज हमने डॉ अंशु दीक्षित से बात करके कुछ जानकारी ली आज की ऑनलाइन क्लासेज की ,डॉ अंशु दीक्षित एक   मनोवैज्ञानिक सलाहकार लखनऊ शहर से हैं।

    डॉक्टर डॉ अंशु दीक्षित कहती हैं कि आज कल जो ऑनलाइन क्लास में जो पढ़ाया जा रहा है उसे बच्चे कितना समझ पा रहे हैं. ऑनलाइन क्लास में टीचर के लिए ये पूछना भी मुश्किल है कि सभी बच्चों को समझ आया या नहीं। बच्चा भी बहुत ज्यादा प्रश्न नहीं पूछ पता हैं ।बच्चा चार से पांच घंटे मोबाइल लेकर क्लासेज कर रहा है. उसके बाद वो टीवी भी देखता है। उसका स्क्रीन टाइम बढ़ गया है. बच्चों के शारीरिक असर के साथ साथ मनोवैज्ञानिक असर देखा जा सकता है। ऐसी स्थिति में बच्चो पर आत्मसंयम की कमी, जिज्ञासा में कमी, भावनात्मक स्थिरता का ना होना, ध्यान केंद्रित ना कर पाना, जैसी समस्याएं बड़ी आसानी से देखी जा सकती हैं।
    डॉ अंशु ने बताया की इ-लर्निंग व्हाट्सअप या ऑनलाइन वली पढ़ाई से बच्चो पर बहुत अच्छा प्रभाव नहीं पड़ रहा है।

    छोटे शहरों में ज्यादातर अभिभावकों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं । छोटे क्लास के बच्चो के लिए ऑनलाइन क्लास करना आज कल के अभिभावक के लिए एक परेशानी से बन गयी है। अभिभावक के दिमाग़ में ऐसे सवाल आना स्वाभाविक है की फ़ोन और लैपटॉप का ज़्यादा इस्तेमाल करने से बच्चो की आँखों और उनके सेहत पर बहुत ज्यादा असर पड़ सकता हैं।

    ऑनलाइन क्लासेज के लिए विशेष बातें ध्यान रखे जिससे बच्चे मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रहें.

    1. स्क्रीन टाइम को फिक्स करे जैसे ऑनलाइन क्लास के बाद टीवी और मोबाइल के इस्तेमाल का समय कम
    कर दें।
    2. ऑनलाइन क्लास के बाद परिवार के साथ समय बिताएं।

    3. बच्चों को फिजिकल एक्टिविटी के लिए प्रोत्साहित करें. 4. लैप टॉप और टेबलेट स्क्रीन को बच्चे से दो फ़ीट की दूरी पर रखें।

     लखनऊ की प्रवक्ता रीता शुक्ला जी का कहना है की ऑनलाइन क्लास के द्वारा कुछ विषय को पड़ना बहुत ही मुश्किल है जो विषय प्रैक्टिकल पर आधारित हैं उनको आप ऑनलाइन क्लासेज के द्वारा कैसे पढ़ा सकते हो। जरुरी नहीं है की हर स्टूडेंट्स के पास स्मार्ट फोन हो और वो ऑनलाइन क्लास कर सके। ऑनलाइन क्लास करते समय नेट की प्रॉब्लम बहुत बड़ी है।

     शाहजहाँपुर की शिक्षिका अमिता दीक्षित जी का कहना है की आज कल ऑनलाइन क्लास में सारे स्टूडेंट्स क्लास अटेंड नहीं कर पाते है । टीचर और स्टूडेंट्स का इंटेराक्शन नहीं होपाता है। क्लास में हर तरह का स्टूडेंट्स होता है कुछ स्टूडेंट आसानी से समझ लेते है कुछ पढ़ाई में कमजोर स्टूडेंट्स भी होते हैं उनके लिए परेशानी है। क्योकि क्लास में आप हर बात को कई बार पूछ सकते हो समझ सकते हो ऐसा ऑनलाइन क्लास में नहीं हैं। इससे स्टूडेंट्स पर मानसिक दवाव ज्यादा होता जा रहा है।

    एक अभिभावक का ये भी कहना हैं की हमारी शिक्षा व्यवस्था अभी उस स्तर पर नहीं है जिस स्तर पर हम अपनी शिक्षा को ऑनलाइन का रूप से करा पाए । शिक्षा को ऑनलाइन स्तर पर बिना व्यवस्था के लाने के कारण छात्रों को कई प्रकार के संकटो का सामना भी करना पड़ रहा है।

    स्कूल प्रशासन द्वारा दी गई जिम्मेदारी से टीचर्स भी अपना काम पूरा कर रही है वो चाहे प्रभाव शाली हो या न हो । वैसे टीचर साल भर तो ढंग से पढ़ाते नहीं और अभी ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं अगर ये टीचर इतना ही समर्पित होते तो शायद बच्चो को टूटिशन या कोचिंग नहीं करनी पड़ती। ये सारी नौटंकी फीस के लिए हो रही हैं। आने वाले समय मैं यह एक बड़ा मुद्दा बनेगा स्कूल फीस माफ़ नहीं करेगा और तमाम अभिभावक ऐसे हैं जिनकी कमर इस कोरोना वायरस महामारी के लॉक डाउन मैं टूट चुकी हैं सरकार को इस विषय पर अपनी स्तिथि स्पष्ट करनी चाहिए।

    क्योंकि मुझे नहीं लगता की एजुकेशन माफिया फीस को माफ़ होने देंगे। अंत में उपर्युक्त पाठ का यही सार निकलता है की आज के समय में डिजिटल शिक्षा जरुरी तो है, फिलहाल लम्बे समय के लिए ये ऑनलाइन पढ़ाई व्यावहारिक नहीं हैं इसके फायदे बहुत कम और नुकशान ज्यादा हैं। लेकिन इसका दुष परिणाम एक हद तक छात्रों को मानसिक, शारीरिक और चारित्रिक हनन का शिकार भी होते जा रहे है।

    विजय लक्ष्मी सिंह
    एडिटर इन चीफ आईएनए न्यूज़ एजेंसी


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