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    सहारनपुर में 500 साल में पहली बार ईदगाह में अदा नही हुई ईद की नमाज़


    सहारनपुर में 500 साल में पहली बार ईदगाह में अदा नही हुई ईद की नमाज़

    (मस्जिद में पाँच लोगों ने सोशल डिसटेंसिंग का ध्यान रखते हुए पढ़ी नमाज़, बाक़ी सभी ने अपने अपने घरों में अदा की ईद की नमाज़)



    सहारनपुर।  कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते जहां देशभर में लॉक डाउन लगा हुआ है, वही मुसलमानों के सबसे बड़े त्यौहार ईद उल फितर की नमाज घरों में अदा की गई। सहारनपुर के बेहट कस्बे की ईदगाह में करीब 500 साल बाद पहली बार ईदगाह में ईद की नमाज अदा नहीं की गई।

    कोरोना की रोकथाम को लेकर देशभर में लॉक डाउन लगा हुआ है और तमाम धार्मिक स्थल बंद है। ऐसे में मुसलमानों के सबसे पवित्र माह रमजान में तरावीह व जुमे की नमाज भी घरों में अदा की गई और सबसे बड़े त्यौहार ईद उल फितर की नमाज भी नियमों का पालन करते हुए घरों में पढ़ी गई। बेहट ईदगाह की इंतजामिया कमेटी के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद अहमद काजमी एडवोकेट ने बताया कि बेहट कस्बे का इतिहास करीब 500 साल पुराना है और लगभग पहली बार ऐसा हुआ है कि बेहट कस्बे की ईदगाह में ईद की नमाज नहीं हुई। शाही जामा मस्जिद के इमाम मौलाना राशिद जमाल क़ासमी ने बताया कि रमजान की तरह ही ईद की नमाज़ भी घरों में अदा की गई और मस्जिदों में सरकारी हुक्म के मुताबिक 5 लोगो ने नमाज अदा की। इस दौरान पुलिस द्वारा कड़े प्रबंध किए गए और सभी मस्जिदों और ईदगाह में लगातार पुलिस गश्त करती रही। 

    देश दीपक शर्मा

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