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    कोरोना वायरस से भारतीय अर्थव्यवस्था व पर्यावरण के प्रभाव पर




    कोरोना वायरस से भारतीय अर्थव्यवस्था व पर्यावरण के प्रभाव पर


    कोरोना वायरस से भारतीय अर्थव्यवस्था की आज हम बात करे तो धीरे धीरे हमारी अर्थव्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ती जा रही है। कोरोना वायरस से संक्रमित कई हजारो लोगो की जान जा चुकी है| जिस कारण बाज़ार बंदी हो रही है जिससे अर्थव्यवस्था को हजारो करोड़ का नुकसान हो रहा है। भारतीय व्यापार में 60%-70% तक की गिरावट देखी जा सकती है। हमारे अनुमान से कोरोना वायरस से हुई बाज़ार बंदी से विकास दर 6-6.5% होनी चाहिए थी वह अब लगभग 2.5% हो गयी हैं। सकल घरेलू उत्पाद दर (जी.डी.पी.) को बंदी की वजह से 2.5% से 3.00% तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। घरेलू उड़ान जो एक हफ्ते में 2712 व विदेशी 450 होती थी उसमे 75% की कमी आ जाने के कारण हवाई कंपनियों को 8200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। होटल उघोग को 470 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़


    रहा है। भारत सरकार को जी.एस.टी की 1.25 लाख करोड़ रुपये की वसूली में बाधा पैदा हो रही | भारत में बनाकर विदेशो में बेचे जाने कपड़ो में 35% ऑर्डर निरस्त हुए है जिस कारण 1 लाख करोड़ का नुकसान होने की सम्भावना है, भारतीय रेल में यात्रियो द्वार मार्च के महीने में लगभग 12 लाख टिकट निरस्त कराये गये थे। जिसके 85 करोड़ रुपये की वापिसी रेलवे ने की थी तथा रेलवे की कुल कुल हानि 450 करोड़ रुपये हुई है है| भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले शेयर बाज़ार को 11.84 लाख करोड़ रुपये का नुकसान कोरोना की वजह से उठाना पड़ रहा है| इलेक्ट्रोनिक व्यापार को 15% तक का नुकसान उठाना पड़ा है,आयत


    व्यापार में 55% की गिरावट होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को हानि उठानी पड़ेगी, मॉस उधोग को हर हफ्ते 80000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है| आर.बी. आई. की सुचना अनुसार लगभग 80% रुपये का नकद प्रवाह रुक गया है| इन सभी क्षेत्रो से हुए नुकसान से आने वाले समय निश्चित ही बेरोजगारी बढ़ेगी है, इस प्रकार के हालत रहे तो विकास दर में कमी आएगी जिससे सबसे ज्यादा नुकसान दिहाड़ी मजदूर वर्ग को होगा। देश की अर्थव्यवस्था विकासशील अर्थव्यवस्था से नीचे आ सकती है, यह कोई बड़ी बात नहीं है कि पिछड़े इलाको में भुखमरी जैसे हालत हो जाये।

    कोरोना काल में जब सब कुछ लॉक डाउन हैं कोई किसी भी तरीके का प्रदूषण नहीं हो रहा हैं। पर्यावरण पर प्रभाव की बात करे तो एयर क्वालिटी इंडेक्स (ए।क्यू।आई।) में बहुत सुधार हो रहा है। 

    नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ( एन.जी.टी.) के अनुसार मानव स्वास्थ के लिए वायु गुणवक्ता सुचकांक एयर क्वालिटी इंडेक्स (ए.क्यू.आई.) 150 बिंदु तक तो ज्यादा नुकासानदेह नहीं है किन्तु 151 से 200 बिंदु तक जाना मानव स्वास्थ के लिए नुकसानदेह साबित होता है।



    लॉक डाउन के पहले मतलब २0 मार्च तक के आंकड़े देखे तो लगभग सारे महानगर शहर में 250 से 700 एयर क्वालिटी इंडेक्स बिंदु प्राप्त होते थे। जिससे कई शहरों में स्मोग वातावरण जैसा होने लगा था ऐसा फोग की तरह लगता था जो की हमारे स्वास्थ के लिए बहुत हानिकारक था । एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के बिंदु देख कर और पहले चरण लॉक डाउन के बाद एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के बिंदु देख कर ऐसा लगता हैं की पर्यावरण में काफी सुधार हो गया है। 

    लॉक डाउन के पहले चरण के बाद एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की रिपोर्ट के अनुसार मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद बैंगलौर, दिल्ली, के साथ साथ देश के विभिन्न शहरो में वायु प्रदुषण में 70 से 80 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, अभी प्रदुषण में गिरावट जारी रहेगी, इन आकड़ो के अनुसार बंदी का पर्यावरण पर सकरात्मक प्रभाव पड़ा है, आज आप देखे तो गंगा नदी का जल 40% तक साफ़ हुआ है । इस वायु वातावरण के सुधार के कारण जिससे त्वचा रोग, सांस, अस्थमा, और हृदय रोग, फेफड़े यदि में कमी आएगी। विशेषज्ञों की माने तो इस समय वायु के शुद्ध होने के कारण पर्यावरण पर किया जाने वाला शोध और सार्थक होगा।

    Dr. Rupak Srivastava
    Assistant Professor
    Department of Commerce Savitri Devi Girls Degree College
    Powayna, Shahjahanpur, U.P.

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