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    जंग ए आजादी के महान् यौद्धा थे उन्हाणी (हरियाणा) के नेतराम"

    जंग ए आजादी के महान् यौद्धा थे उन्हाणी (हरियाणा) के नेतराम"
    वो वीर थे,वो धीर थे,जो रुके नही, अडिग रहे,
    माँ भारती की शान में,जिनके कर्म  सब निहित्त रहे।
    सलाम उन शूरमाओं का,जो आजादी की जंग के सिपाही रहे।

    हिन्दुस्तान की पावन भूमि से स्वतंत्रता सेनानियों की खुशबू की महक आज भी देश विदेश में बसे प्रवासी अप्रवासी  भारतीय सभी समान रूप में,महसूस करते है। लेकिन जो हिन्दुस्तान में है ,वे इन महान स्वतंत्रता सेनानियों को अपने आदर्श के रुप में देखते हैं।
    ऐसे ही एक यौद्धा स्वतंत्रता सेनानी रहे  है , नेतराम जी, जिनकी कहानी से आज आप रूबरू है।उन्ही के पुत्र मास्टर राजेश जी की कलम से।


    कनीना उपमंडल के गांव उन्हाणी में खुशहाल के घर 1918 में  जन्मे नेतराम ने "जंग ए आजादी" में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।बचपन में ही इनके पिता का देहांत हो गया था ।इनकी माता धापा देवी ने इनका लालन पालन किया।इनकी माता बहुत संघर्ष शील व देशभक्ति के विचारों की महिला थी।वे चाहती थी उनका बेटा देश की आजादी के लिए कुछ करें।उन दिनों आजादी के लिए सभी के अंतर में एक ज्वाला जग रही थी।
    वे 22वर्ष की आयु में 7वीं  राज राईफल्स सेना में भर्ती हो गए।  प्रशिक्षण के बाद अंग्रेजों ने इनकी बटालियन को जापान से लड़ने के लिए भेज दिया ।
    क्योंकि अंग्रेजी सरकार पूरे विश्व में अपनी प्रभुत्व चाहती थी,वहां जापानियों ने भारतीय सैनिकों को  बन्दी  बना लिया।
    इसी दौरान स्वतन्त्रता के लिए लड़ाई लड़ रहे  उन वीर योद्धाओ में से,श्री रास बिहारी बोस, सिंगापुर पहुंचे और भारतीय बंदी सैनिकों को छुड़ाकर 1942मे आजाद हिन्द फौज का गठन किया ।जिसमें स्वाभिमानी भारतीय सैनिक सहर्ष शामिल हो गए जिसमें नेतराम भी शामिल हुए। लेकिन यह सेना अधिक समय तक टिक नहीं पाई और जापानियों ने पुनः बंदी बनाकर तोपखाना जेल में डाल दिया।
    इसके बाद शेर ए हिन्द सुभाष चन्द्र बोस अंग्रेजी सरकार के आंखों में धूल झोंककर सिंगापुर पहुंचे।वहां उन्होंने 22अक्टुबर 1943 को आजाद हिन्द फौज का पुनर्गठन किया । उन्होंने अपनी सेना में शामिल होने से पूर्व तीन शर्तें  रखी, कि मेरे साथ आजादी की लड़ाई लड़ने वालों को लंबी -लंबी तकलीफ; भूख सहनी पड़ेगी तथा खून देना होगा।जो भी भाई जान से ज्यादा देशभक्ति व भारत माता के प्रति अपनी निष्ठा पर भरोसा रखता हो।वही इस फ़ौज में शामिल हो।ये सभी बातें
     जिस भाई को मंजूर हो वह मेरे साथ आ जाएं। नेतराम जी भी  नेता जी के विचारों से प्रभावित हुए ,और उनकी  सभी शर्तों को मान लिया।इसी के साथ वो आजाद हिन्द फौज के नेहरू बिर्गेड में शामिल हो गए।
    आज़ाद हिन्द फौज में रहते हुए उन्होंने वतन की आजादी के लिए बर्मा की रंगून जेल ; पाकिस्तान की मुल्तान जेल ; बंगाल की गिरगिच्छा जेलो में कठोर यातनाएं सही।
    रंगून जेल में  इनके खाने के चावलो  में चूना मिला दिया जाता था  जो कि बिल्कुल खाने लायक नहीं होते थे। जब इस आजादी के यौद्धा को जेल से बाहर थोड़ा बहुत घूमाने ले जाया जाता तब वह कपड़े में छिपा कर उन चूनायुक्त चावलो को साथ ले जाते और कही थोड़ा बहुत पानी मिलता तो उनमें  चावलो को डुबो डुबो कर खाने लायक बनाते।यही पर उनके साथी रागिनी कलाकार मेहर सिंह की मौत इन चूना मिले चावलो के खाने से हो गई थी।
    बंगाल की गिरगिच्छा जेल में इनको भूखा रखा जाता था यह सेनानी पेड़ों की छाल खाकर अपना जीवन बचाते थे। बहुत कठोर यातनाएं उन्होंने इस जेल में सही थी। पाकिस्तान की मुल्तान जेल में जहां रखा जाता था वह बहुत संकीर्ण थी उस कोठरी में आराम से बैठा नहीं जाता था सोने की बात तो बहुत दूर। और भी अनेको प्रकार की यातनाओं का वर्णन वो अक्सर बताते थे।पर सत्य तो ये है, की
     जिनको वतन पर जान देनी हो,
    तो मुश्किलें कैसे रोकेंगी,वो दिवाने ऐसे थे जो,वतन को महबूब समझते थे।
    लेकिन अंग्रेजों की इतनी कठोर यातनाओ के बाद भी भारत माता का यह सपूत न उनके आगे झुका न ही संघर्ष से रुका। इनकी रिहाई मुल्तान जेल से ही हुई। नेतराम आजाद हिन्द फौज के सच्चे सिपाही वह कर्मठ देशभक्त यौद्धा थे जिन्होंने वतन की आजादी के लिए अनेक कष्ट एवं यातनाएं सही।
    नेतराम की बहादुरी व भारत माता को आजाद करवाने के लिए 15 अगस्त 1972को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्र की ओर से ताम्र पत्र देकर सम्मानित किया। ताऊ देवीलाल ने भी उनको सम्मान सहित ताम्र पत्र प्रदान किया।1997 तत्कालीन मुख्यमंत्री बंशीलाल ने राज्य की ओर से ताम्र पत्र देकर सम्मानित किया।26अप्रेल 2007को यह वीर सेनानी पंचतत्व में विलीन हुए। उसी दौरान उनके निधन पर हरियाणा विधानसभा में दो मिनट का मौन रखकर उन्हे सच्ची श्रद्धांजलि दी गई थी। नेतराम का देशभक्ति का जब्बा आज भी देश के जवानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है।   देश के प्रत्येक आजाद नागरिक को उनकी देशभक्ति पर  फख्र है। भारत माता के ऐसे सच्चे सपूत को शत् शत् नमन।
    आज उनका परिवार भी उन्ही के मार्गदर्शन पर चल देश व समाज की,बुराइयों कुरीतियों से लड़ने के लिए शिक्षा व समाजसेवा के क्षेत्र
    में अपना योगदान दे रहा है।उनके सुपुत्र समाजसेवा के लिए अनेक संस्थाओ द्वारा सम्मानित किए जा चुके है।दिल्ली की एक संस्था के साथ जुड़ कर वो शिक्षा व सदाचार के लिए एवम महिला उत्थान के कार्यो में अपना योगदान दे रहे है।

    राजेश कुमार पुत्र स्व श्री नेतराम स्वतंत्रता सेनानी

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