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    सिर्फ 8 रुपये गुरु दक्षिणा देकर आरके श्रीवास्तव के शैक्षणिक आंगन से बनते है इंजीनियर


    देश में मेडिकल, इंजीनियरिंग, बैंकिंग, आईएएस, आईपीएस जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ना जाने कितने कोचिंग इंस्टीट्यूट होंगे।

    कोचिंग संस्थान चलाने वाले संचालक अपने कोचिंग के प्रचार-प्रसार के लिए ना जाने कौन-कौन से हथकंडे अपनाते होंगे।कोचिंग चलाने के नाम पर छात्रों से रकम वसूलने के किस्से भी आए दिन सुनने को मिलते रहते है।लेकिन इन सबके बीच देश मे मैथमेटिक्स गुरु के नाम से मशहूर मैथमेटिक्स गुरु फेम आरके श्रीवास्तव  जिसके बारे में सुनकर आप हैरान हो जाएंगे।   आरके श्रीवास्तव के शैक्षणिक संस्थान में स्टूडेंट्स से ली जाती है

    सिर्फ 8 रुपये / माह गुरु दक्षिणा यानी एक वर्ष में सिर्फ 100 रुपये गुरु दक्षिणा। 


    8 रुपय गुरु दक्षिणा का हिसाब पिछले 10 वर्षों से 8 रुपए गुरु दक्षिणा लेकर स्टूडेंट्स को गणित पढ़ा रहा एक नौजवान


    प्रतियोगिता का दौर, गिरता शिक्षा स्तर और स्टूडेंट्स की मजबूरी शायद इन्ही कारणों से कोचिंग संस्थानों का बाजार गर्म है। लेकिन व्यवसीयकता के इस दौर में बिहार के युवा गणितज्ञ मैथमेटिक्स गुरु आरके श्रीवास्तव के लिए शिक्षा कोई 'बजारू' चीज नही है। वे छात्रों का भविष्य सवारने और कोचिंग संस्थानों को करारा जवाब देने के लिए पिछले 10 वर्षो से सिर्फ 8 रुपया गुरु दक्षिणा लेकर गणित का गुर स्टूडेंट्स को सिखाते है और वैसे स्टूडेंट्स जो बिल्कुल आर्थिक रूप से गरीब है उन्हें  निःशुल्क शिक्षा के अलावा शैक्षणिक अन्य सुविधाएं  जैसे कॉपी किताबे  आरके श्रीवास्तव उपलब्ध कराते है।

    आमतौर पर शिक्षा के स्तर का गिरावट का सबसे बड़ा खामियाजा इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे तकनीकी विषयो की पढ़ाई करने वाले छात्र- छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। जिन्हें कोचिंग के लिए लाखों रुपये देने पड़ रहे है। पिछले कई वर्षो से आरके श्रीवास्तव ने शिविर लगाकर इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हजारो गरीब स्टूडेंट्स को नाईट क्लासेज प्रारूप के माध्यम से पूरे रात लगातार 12 घण्टे तक गणित के सवाल हल करने की नई -नई तकनीको और बारीकियों की जानकारी दे रहे। आरके श्रीवास्तव के नाईट क्लासेज प्रारूप के तहत लगातार 12 घण्टे पूरे रात निःशुल्क शिक्षा देने हेतु इनका नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड एवम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज हो चुका है।

    उनका दावा है कि इस शिविर में पढ़ाई करने वाले में से प्रत्येक वर्ष 60% से अधिक छात्र-छात्राएं आईआईटी, एनआईटी, एनडीए सहित तकनीकी प्रवेश परीक्षाओं में सफल होते है। छात्रों के इस नाईट क्लासेज शिविर की ओर आकर्षित होना देश मे चर्चा का विषय बन चुका है।
       
    मैथमेटिक्स गुरु आरके श्रीवास्तव न सिर्फ बिहार में लोकप्रिय है बल्कि अपने गणित पढ़ाने के जादुई तरीके एवम गणितीय शोध के लिए प्रायः सुर्खियों में भी रहते है। क्लासरूम प्रोग्राम में सिर्फ 50 मिनट में ही पाइथागोरस प्रमेय को 50 से ज्यादा तरीको से सिद्ध कर आरके श्रीवास्तव ने गणित विरादरी में काफी वाहवाही लुटा। गूगल बॉय कौटिल्य पंडित के गुरु के रूप में भी देश इन्हें जानता  है।

      फिलहाल वह गरीब छात्रों को शिक्षा देने में जुटे हुए है। उनके इस प्रयास से प्रभावित होकर अलग- अलग क्षेत्रों के उच्चे ओहदे के कुछ लोगो ने शिविर में अतिथि शिक्षक के बतौर छात्र- छात्राओ को पढ़ाया। बहरहाल श्रीवास्तव ने कोचिंग संस्थानों के विरोध का एक नायब सूत्र ढूंढा है, बकौल आरके श्रीवास्तव, " गणित की शिक्षा देना मेरा पेशा नही बल्कि शौक है, ब्यवसायिक शिक्षण में छात्र- छात्राओं और शिक्षकों के बीच परस्पर प्रेम और विश्वास का संबंध नही रह पाता और वैसे भी मैं तो एक छात्र हु। 

    इन दिनों इसी वर्ष 2019 से आरके श्रीवास्तव 11वी, 12वी एवम जेईई  की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स को गणित पढ़ाने हेतु बिहार के आरा जिला में भी सिर्फ 8 रुपये में गणित का गुर सिखाते नजर आ रहे है। आरके श्रीवास्तव बताते है कि आने वाले दिनों में "आर्थिक से गरीबो की नही रुकेगी पढ़ाई" अभियान को देशव्यापी रूप दिया जाएगा। बिहार के रोहतास जिला के बिक्रमगंज शहर में यह अभियान पिछले 10 वर्षो से चल रहा है। 

    सैकड़ो गरीब प्रतिभाएं निःशुल्क शिक्षा ग्रहण कर आईआईटी, एनआईटी, एनडीए, बीसीईसीई सहित देश के प्रतिष्टित संस्थानों में दाखिला ले अपने सपने को पंख लगा रहे। रोहतास की तरह बिहार के आरा जिला के स्टूडेंट्स भी अब आरके श्रीवास्तव से सिर्फ 8 रुपये गुरु दक्षिणा में गणित का गुर सीख रहे।

    आरके श्रीवास्तव के शैक्षणिक आंगन में पढ़ते हैं कई राज्यों के बच्चे। देश के विभिन्न राज्यो की शैक्षणिक संस्थाएं आरके श्रीवास्तव के नाईट क्लास मॉडल एवम शैक्षणिक कार्यशैली को समझने के लिए गेस्ट फैकल्टी के रूप में अपने यहाँ शिक्षा देने के लिए बुलाते है।

    आरके श्रीवास्तव के शैक्षणिक आंगन में ऐसा नहीं है कि सिर्फ बिहार के छात्र पढ़ते हैं बल्कि शैक्षणिक आंगन में झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से भी छात्र आकर आरके श्रीवास्तव  से मिलकर उनसे गणित का गुर सीखते है। छुट्टी के दिनों में अन्य राज्य के स्टूडेंट्स भी श्रीवास्तव से गणित का गुर सीखते है।

    आर के श्रीवास्तवा की बचपन भी काफी गरीबी से गुजरा है. परन्तु अपने कड़ी मेहनत, उच्ची सोच, पक्का इरादा के बल पर आज देश मे मैथमेटिक्स गुरु के नाम से मशहूर है, वे कहते हैं कि मेरे जैसे देश के कई बच्चे होंगे जो पैसों के अभाव में पढ़ नहीं पाते।आरके श्रीवास्तवा अपने छात्रों में एक सवाल को अलग-अलग मेथड से हल करना भी सिखाते हैं. वे सवाल से नया सवाल पैदा करने की क्षमता का भी विकास करते है।


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