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    जेट के खरीदारों को फ्लाइंग लाइसेंस की जांच का इंतजार


    नई दिल्ली, 30 जून- जेट एयरवेज को एक तरफ खरीदारों का टोटा पड़ा है, तो दूसरी तरफ इसकी प्रमुख संपत्ति-फ्लाइंग लाइसेंस एविएशन की नियामक की जांच की तहत है, जिससे एनसीएलटी-समर्थित समाधान प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है। 

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    जेट के खरीदारों को फ्लाइंग लाइसेंस की जांच का इंतजार
    उद्योग के अंदरूनी सूत्रों ने इस घटनाक्रम पर कहा कि खरीदार, नियामक की अंतिम टिप्पणी का इंतजार कर रहे हैं, जिसकी 16 जुलाई को घोषणा की जाने की उम्मीद है।यहां तक कि अब एयरलाइन के बैंकर भी घबराए हुए हैं। रद्द एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट (एओसी) एयरलाइन से अपेक्षित रिकवरी की कम होगी, जिस पर 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है।

    हालांकि, एनसीएलटी द्वारा जेट एयरवेज के समाधान के मामले को राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा बताया गया है। ऐसे में समाधान पेशेवरों ने उड्डयन नियामक से एओसी की वैधता को व्यापाक रूप से विस्तार दिए जाने का आग्रह किया गया है।वहीं, खरीदारों ने ग्राउंडेड एयरलाइन में रुचि दिखाई है।

    हाल ही में, लंदन स्थित आदिग्रुप ने जेट एयरवेज इंप्लाई कंसोर्टियम के साथ भागीदारी की, जिसने इनसॉल्वेंसी समाधान प्रक्रिया के तहत जेट की 75 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए बोली लगाई।आदिग्रुप के चेयरमैन संजय विश्वनाथन ने कहा कि संयुक्त रूप से बोली लगाने वाली कंपनी से 2,500 करोड़ रुपये से 5,000 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है। 

    उन्होंने कहा कि सटीक आंकड़ों पर वित्तीय विवरण के एक बार पूरा हो जाने के बाद पहुंचा जाएगा।इसी तरह से उन्होंने फंडिंग के स्रोत का खुलासा नहीं किया, लेकिन कहा कि आदिग्रुप का 49 फीसदी हिस्सा होगा और इसके बाद इंप्लाई कंसोर्टियम का 26 फीसदी और बाकी का भारतीय ऋणदाताओं का होगा।

    एनसीएलटी प्रक्रिया इस बात पर जोर देती है कि समाधान पेशेवर सबसे पहले जेट से देय राशि के वास्तविक दावेदारों की सूची को अंतिम रूप देंगे। इसमें सभी को आईआरपी के सक्षम जुलाई तक दावों को प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

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