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    बर्फीली मौत को चकमा दे फहराया भारत की आन बान शान तिरंगा। एवेरस्ट पर तिरंगा फहरा कर अपने देश भारत का नाम रोशन किया




    अदम्य साहस,अद्भुत इच्छाशक्ति,मौत से लड़ने का हौसला,देश के मान के जिम्मेदारी और एक किसान का माटी के लिए  फना होने वाला जज्बा।ये कहानी है उस किसान की बेटी की जिससे आने वाली पीढियां एक प्रेरणा लेंगी।

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    बर्फीली मौत को चकमा दे फहराया भारत की आन  बान शान तिरंगा।

    बर्फीले तूफानों को चीर कर विकास राणा ने फतेह की विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवेरस्ट 

    मिलिए विकास के ख्वाबो के सफर की दास्तना से।

    नरवाना, 29 मई (नरेन्द्र जेठी) गावं सुदकैन खुर्द में एक साधारण किसान परिवार में जन्मी विकास राणा के बुलंद होंसलो के आगे विश्व की हर ऊंचाई छोटी पड गई 

    साउथ अफ्रीका की किलि मंजारो और रशिया की माउंट एल्ब्रुस को फतेहकर तिरंगा फहराने एवं भारत का नाम रोशन करने वाली इस साहसी लडकी विकास राणा ने अब विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवेरस्ट को भी फतेह कर भारत का तिरंगा फहराते हुए साबित कर दिया की बेटियाँ किसी से कम नहीं । 

    साधारण किसान परिवार में जन्मी विकास राणा

     बेटी पढाओ बेटी बचाओ के नारे को सार्थक कर दिखाया ,कि मंजिले उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है । पंखों से कुछ नही होता, हौसलो से उड़ान होती है। कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती । बशर्त मन में  जज्बा कायम होना चाहिए, यदि इंसान के मन में उत्साह और कुछ कर गुजरने की हिम्मत हो तो जिंदगी में कुछ भी हासिल किया जा सकता है । 

    अपने इन्हीं हौसलो के बदौलत गांव सुदकैन खुर्द में एक साधारण किसान  परिवार में जन्मी  बेटी विकास राणा  हरियाणा की एकमात्र स्कीइंग की अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी है और एक पर्वतारोही भी है । वे अब अपने माउंट एवेरस्ट अभियान में न केवल सफलता पूर्वक तिरंगा माउंट एवेरस्ट पर फहराकर आई बल्कि पूरी दुनिया में ये साबित कर दिया की बेटियाँ किसी भी ऊंचाई को छूने  में सक्षम है । 

    माउंट एवरेस्ट  जिसकी ऊंचाई 8848 मीटर है । इस चढ़ाई में 2 महीने का समय लगता है , माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए 30 लाख रुपए का खर्चा आता है ।  

    अपनी बेटी के सपने को पूरा करने के लिए विकास राणा के पिताजी ने अपनी जमीन गिरवी रख व राजपूत समाज ने अपनी बेटी विकास राणा को 30 लाख रुपए इक्कठे करके दिए ।  इस मिशन में भी राजपूत समाज ने हर संभव आर्थिक मदद की  विकास राणा के  पिता ओमप्रकाश एक किसान है।जिन्होंने अपनी माँ स्वरूप जमीन भी बिटिया के सपनों के लिए बेच दी।

     विकास राणा ने 2011 में जम्मू कश्मीर के जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग विंटर स्पोर्ट्स  इंस्टीट्यूट में कोर्स करके पर्वतारोहण की शुरुआत की । इसके साथ साथ इन्होंने स्कीइंग में भी देश और प्रदेश में अपना नाम चमकाया, विकास राणा  हरियाणा की इकलौती इंटरनेशनल स्कीइंग की खिलाड़ी है । इन्होंने 5 बार नेशनल गेम में भाग लिया है, वर्ष 2018 में इन्होंने नेशनल गेम में सिल्वर मेडल प्राप्त किया था । 

    विकास राणा ने 5 अप्रैल 2019 को अपना  माउंट एवरेस्ट अभियान शुरू कर दिया था । कंपनी को रिपोर्ट कर एवेरस्ट चढाई  शुरू कर दी थी  । बेस कैंप से  माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू हो गई और बर्फीले तूफानों एवं अनेक कठिन परिस्थितियो को लांघते हुए और मौत को चकमा देकर अपनी पूरी तयारी और होंसले के साथ एवेरस्ट पर तिरंगा फहरा कर अपने देश भारत का नाम रोशन किया।   25 जुलाई 2018 को इन्होंने साउथ अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो को फतह किया था ।  5 सितंबर 2018 को इन्होंने यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस को फतह कर स्कीइंग करते हुए नीचे आई , ऐसा करने वाली विकास राणा पहली भारतीय महिला बन गई । अब यह कारनामा करने वाली भारत की इकलौती खिलाड़ी  है और इंडिया बुक रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा चुकी है ।
      
    एवेरस्ट पर तिरंगा फहरा कर अपने देश भारत का नाम रोशन किया

    माउंट एवरेस्ट के शिखर पर  विकास राणा का माउंट एवेरस्ट फतेह करने का अभियान पूरा हो गया है और वे काठमांडू पहुंच गई है । वह कसे और किन हालत से जूझते हुए आगे बढी  ये सुनना हम जसे आम आदमी के लिए तो रोमांच की बात हो सकती है किन्तु अडचने और मुश्किलें विकास का हौंसला नहीं तोड पाई और वे तमाम बाधाओं को पार करते हुए अपने मिशन में सफल रही । उनकी इस सफलता पर माँ बाप परिवार और गावं को ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा और भारत को गर्व है । आज विकास राणा देश की  बेटियों के लिए एक प्रेरणा बन गई  है ।


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