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    हनुमान जयंती का त्यौहार - बालाजी का जन्मदिन


    हनुमान जयंती का त्यौहार - बालाजी का जन्मदिन

    हनुमान जी के प्रसिद्ध नाम और उनका मुख्य अर्थ :-

    हनुमान जयंती का त्यौहार बालाजी के भक्तो के लिए सबसे बड़ा त्यौहार है हनुमान जयंती राम भक्त हनुमान जी के जन्मोस्त्सव के रूप में बड़ी धूम धाम से हनुमान भक्तो के द्वारा मनाई जाती है
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    हनुमान जयंती का त्यौहार - बालाजी का जन्मदिन
    महावीर हनुमान को सबसे शक्तिशाली देवता के रूप में पूजा जाता है,श्री हनुमान जयंती त्यौहार  इन्होने भगवान श्री राम के चरणों में अपने जीवन को समर्प्रीत कर दिया और राम भक्ति में इनका कोई सानी नहीं हैये अमर और चिरंजीवी हैइन्होने असंभव कार्यो को चुटकी भर पल में समूर्ण कर दिया है , अतः इन्हे संकट मोचन के नाम से भी पुकारा जाता है

    इनकी भक्ति करने से हनुमान कृपा के द्वारा मनुष्य को शक्ति और समर्पण प्राप्त होता हैइनकी भक्ति से अच्छा भाग्य और विदुता भी प्राप्त होती है

    हनुमान जयन्ती कब मनाई जाती है :-
    हनुमान जयन्ती भगवान् महावीर हनुमान जी के जन्मोत्सव के मनाई जाती हैयह दिन चैत्र शुक्ल पुर्णिमा का दिन थामाना जाता है की सुबह 4 बजे उन्होंने माँ अंजना के कोख से जन्म लिया था,वे भगवान् शिव के11वे अवतार थे,जो वानर देव के रूप में इस धरा पर राम भक्ति और राम कार्य सिद्ध करने अवतरित हुए थे.


    हनुमान जयंती 2019 विशेष-
    हर वर्ष के तरह इस वर्ष भी हनुमान जयंती का कार्यक्रम काफी धूम-धाम के साथ मनाया जायेगा। जिसे देखते हुए पूरे देशभर में इस विशेष दिन को लेकर तैयारियां की जा रही है, ताकि इस विशेष दिन को और भी खास बनाया जा सके। 

    हनुमान जयंती को कब और कैसे मनाते हैं-
    प्रभु श्री हनुमान, भगवान श्री राम के बहुत बड़े भक्त, पूरे भारत में हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा प्रभु श्री राम में अपनी गहरी आस्था के कारण पूजे जाते हैं। हनुमान जयंती के दिन पर, सभी हनुमान मंदिरों में बहुत अधिक भीड़ हो जाती है, क्योंकि लोग सुबह पवित्र स्नान करने के बाद से ही इनकी पूजा करना शुरु कर देते हैं। हनुमान जयंती हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा हिन्दूओं के एक महत्वपूर्ण त्योहार के रुप में बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाई जाती है,यह एक महान हिन्दू उत्सव है, जो सांस्कृतिक और परंपरागत तरीके से मनाया जाता है।
    हनुमान जयंती का त्यौहार - बालाजी का जन्मदिन
    लोग हनुमान भगवान की पूजा आस्था, जादूई शक्तियों, ताकत और ऊर्जा के प्रतीक के रुप में करते हैं। लोग हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, क्योंकि यह बुरी शक्तियों का विनाश करने और मन को शान्ति प्रदान करने की क्षमता रखती है। इस दिन हनुमान भक्त सुबह जल्दी नहाने के बाद भगवान हनुमान जी के मंदिर जाते हैं और हनुमान जी की मूर्ति पर लाल सिंदूर (का चोला) चढ़ाते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, लड्डू का प्रसाद चढ़ाते हैं, मंत्रों का जाप करते हुए आरती करते हैं, मंदिर की परिक्रमा आदि बहुत सारी रस्में करते हैं।


    जैसा कि सभी जानते हैं कि, हनुमान जी का जन्म वानर समुदाय में लाला-नारंगी शरीर के साथ हुआ था, इसी कारण, सभी हनुमान मंदिरों में लाल-नारंगी रंग की हनुमान जी की मूर्ति होती है। पूजा के बाद, लोग अपने मस्तिष्क (माथे) पर प्रसाद के रुप में लाल सिंदूर को लगाते हैं और भगवान हनुमान जी से माँगी गई अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए लोगों को लड्डू के प्रसाद का वितरण करते हैं।

    हनुमान जयंती मनाने का महत्व-
    हनुमान जयंती का समारोह प्रकृति के अद्भुत प्राणी के साथ पूरी हनुमान प्रजाति के सह-अस्तित्व में संतुलन की ओर संकेत करता है। प्रभु हनुमान वानर समुदाय से थे, और हिन्दू धर्म के लोग हनुमान जी को एक दैवीय जीव के रुप में पूजते हैं। यह त्योहार सभी के लिए बहुत अधिक महत्व रखता है, हालांकि ब्रह्मचारी, पहलवान और बलवान इस समारोह की ओर से विशेष रुप से प्रेरित होते हैं। हनुमान जी अपने भक्तों के बीच में बहुत से नामोंसे जाने जाते हैं; जैसे- बजरंगवली, पवनसुत, पवन कुमार, महावीर, बालीबिमा, मारुतसुत, संकट मोचन, अंजनिसुत, मारुति, आदि।

    हनुमान अवतार को महान शक्ति, आस्था, भक्ति, ताकत, ज्ञान, दैवीय शक्ति, बहादुरी, बुद्धिमत्ता, निःस्वार्थ सेवा-भावना आदि गुणों के साथ भगवान शिव का 11वाँ रुद्र अवतार माना जाता है। इन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान श्री राम और माता सीता की भक्ति में लगा दिया और बिना किसी उद्देश्य के कभी भी अपनी शक्तियों का प्रदर्शन नहीं किया। हनुमान भक्त हनुमान जी की प्रार्थना उनके जैसा बल, बुद्धि, ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए करते हैं। इनके भक्तों के द्वारा इनकी पूजा बहुत से तरीकों से की जाती है; कुछ लोग अपने जीवन में शक्ति, प्रसिद्धी, सफलता आदि प्राप्त करने के लिए बहुत समय तक इनके नाम का जाप करने के द्वारा ध्यान करते हैं, वहीं कुछ लोग इस सब के लिए हनुमान चालीसा का जाप करते हैं।

    हनुमान जयंती को मनाने के पीछे का इतिहास
    एकबार, एक महान संत अंगिरा स्वर्ग के स्वामी, इन्द्र से मिलने के लिए स्वर्ग गए और उनका स्वागत स्वर्ग की अप्सरा, पुंजीक्ष्थला के नृत्य के साथ किया गया। हालांकि, संत को इस तरह के नृत्य में कोई रुचि नहीं थी, उन्होंने उसी स्थान पर उसी समय अपने प्रभु का ध्यान करना शुरु कर दिया। नृत्य के अन्त में, इन्द्र ने उनसे नृत्य के प्रदर्शन के बारे में पूछा। वे उस समय चुप थे और उन्होंने कहा कि, मैं अपने प्रभु के गहरे ध्यान में था, क्योंकि मुझे इस तरह के नृत्य प्रदर्शन में कोई रुचि नहीं है। यह इन्द्र और अप्सरा के लिए बहुत अधिक लज्जा का विषय था; उसने संत को निराश करना शुरु कर दिया और तब अंगिरा ने उसे शाप दिया कि, “देखो! तुमने स्वर्ग से पृथ्वी को नीचा दिखाया है। तुम पर्वतीय क्षेत्र के जंगलों में मादा बंदर के रुप में पैदा हो।


    उसे फिर अपनी गलती का अहसास हुआ और संत से क्षमा याचना की। तब उस संत को उस पर थोड़ी सी दया आई और उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया कि, “प्रभु का एक महान भक्त तुमसे पैदा होगा। वह सदैव परमात्मा की सेवा करेगा।” इसके बाद वह कुंजार (पृथ्वी पर बन्दरों के राजा) की बंटी बनी और उनका विवाह सुमेरु पर्वत के राजा केसरी से हुआ। उन्होंने पाँच दिव्य तत्वों; जैसे- ऋषि अंगिरा का शाप और आशीर्वाद, उसकी पूजा, भगवान शिव का आशीर्वाद, वायु देव का आशीर्वाद और पुत्रश्रेष्ठी यज्ञ से हनुमान को जन्म दिया। यह माना जाता है कि, भगवान शिव ने पृथ्वी पर मनुष्य के रुप पुनर्जन्म 11वें रुद्र अवतार के रुप में हनुमान वनकर जन्म लिया; क्योंकि वे अपने वास्तविक रुप में भगवान श्री राम की सेवा नहीं कर सकते थे।

    सभी वानर समुदाय सहित मनुष्यों को बहुत खुशी हुई और महान उत्साह और जोश के साथ नाचकर, गाकर, और बहुत सी अन्य खुशियों वाली गतिविधियों के साथ उनका जन्मदिन मनाया। तब से ही यह दिन, उनके भक्तों के द्वारा उन्हीं की तरह ताकत और बुद्धिमत्ता प्राप्त करने के लिए हनुमान जयंती को मनाया जाता है।

    हनुमान मंत्र:-
    मनोजवं मारुततुल्यवेगम्
    जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
    वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
    श्री रामदूतं शरणं प्रपद्ये।।

    हनुमान जी की आरती-
    आरती किजे हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
    जाके बल से गिरवर काँपे, रोग दोष जाके निकट ना झाँके ॥

    अंजनी पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई॥
    दे वीरा रघुनाथ पठाए, लंका जाए सिया सुधी लाए॥

    लंका सा कोट समुंद्र सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई॥
    लंका जाई असुर संहारे, सियाराम जी के काज सँवारे॥

    लक्ष्मण मूर्छित पडे सकारे, लानि संजिवन प्राण उबारे॥
    पैठि पताल तोरि जम कारे, अहिरावन की भुजा उखारे॥

    बायें भुजा असुर दल मारे, दाहीने भुजा सब संत जन उबारे॥
    सुर नर मुनि जन आरती उतारे, जै जै जै हनुमान उचारे॥

    कचंन थाल कपूर लौ छाई, आरती करत अंजना माई॥
    जो हनुमान जी की आरती गावे, बसहिं बैकुंठ परम पद पावें॥

    लंका विध्वंश किए रघुराई, तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥
    आरती किजे हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

    श्री हनुमान चालीसा-

    दोहा:-

    श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।

    बरनऊँ रघुवर विमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

    बुद्धिहीन तनु जानि के, सुमिरौ पवन कुमार।

    बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार।।

    चौपाई-

    जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिंहु लोक उजागर।।

    रामदूत अतुलित बल धामा, अंजनि पुत्र पवन सुत नामा।।

    महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी।

    कंचन वरन विराज सुबेसा, कान्न कुण्डल कुंचित केसा।।

    हाथ ब्रज औ ध्वजा विराजे, कान्धे मूंज जनेऊ साजे।

    शंकर सुमन केसरी नन्दन, तेज प्रताप महा जग वन्दन।।

    विद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिवे को आतुर।

    प्रभु चरित्र सुनिवे को रसिया, राम-लखन सीता मन बसिया।।

    सूक्ष्म रूप धरि सियंहि दिखावा, विकट रूप धरि लंक जरावा।

    भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज सवारे।।

    लाए संजीवन लखन जियाए, श्री रघुबीर हरषि उर लाए।

    रघुपति कीन्हि बहुत बठाई, तुम मम प्रिय भरत सम भाई।।

    सहस बदन तुम्हरो जस गावें, अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावें।

    सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा।।

    यम कुबेर दिगपाल कहाँ ते, कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते।

    तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

    तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना, लंकेश्वर भए सब जग जाना।

    जुग सहस्र जोजन पर भानु, लील्यो ताहि मधुर फल जानु।।

    प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांहि, जलधि लाँघ गये अचरज नाहिं।

    दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

    राम दुलारे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे।

    सब सुख लहे तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहूँ को डरना।।

    आपन तेज सम्हारो आपे, तीनों लोक हाँक ते काँपे।

    भूत पिशाच निकट नहीं आवें, महावीर जब नाम सुनावें।।

    नासे रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत वीरा।

    संकट ते हनुमान छुड़ावें, मन क्रम वचन ध्यान जो लावें।।

    सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा।

    और मनोरथ जो कोई लावे, सोई अमित जीवन फल पावे।।

    चारों जुग परताप तुम्हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा।

    साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे।।

    अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन्ह जानकी माता।

    राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा।।

    तुम्हरे भजन राम को पावें, जनम जनम के दुख विसरावें।

    अन्त काल रघुवर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई।।

    और देवता चित्त न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई।

    संकट कटे मिटे सब पीरा, जपत निरन्तर हनुमत बलवीरा।।

    जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करो गुरुदेव की नाईं।

    जो सत बार पाठ कर कोई, छूटई बन्दि महासुख होई।।

    जो यह पाठ पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा।

    तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मँह डेरा।।

    दोहा-

    पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

    राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

    सिया बल राम चंद्र की जय

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