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    मोदी का नमामि गंगे प्रोजेक्ट हुआ फेल


    गंगा पुत्र' की मौत ने गंगा-घोटाला उजागर किया है.

    हरदोई- गंगा रक्षा के लिए 173 दिनों से अनशन कर रहे मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने श्री श्री रविशंकर के नाम एक खुला खत लिखकर उन्हें सरकार का नुमाइंदा बताया। 

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     मोदी का नमामि गंगे प्रोजेक्ट हुआ फेल
    साथ ही रविशंकर पर भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपरा से उनका कोई सरोकार न होने का आरोप लगाया।उन्होंने ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की ओर से लिखे पत्र को पढ़ते हुए कहा कि श्री श्री रविशंकर ने मातृसदन में आते ही तपस्या की गरिमा और तपस्या के दौरान किए जाने वाले त्याग को कमतर करते हुए आत्मबोधानंद से उपदेशात्मक भाषा शैली में वार्ता की, जो अकुशल वक्ता का परिचायक है। 

    उन्होंने कहा कि प्रयागराज में शारदा नदी से लाए गए जल को गंगा जल बताया गया। जिसमें कोलीफार्म की मात्रा स्वीकृति से दो से चार गुणा अधिक कर दी गई। गंदे नालों को केवल कुंभ तक ही रोका गया, लेकिन कुंभ के बाद गंगा वहां नाले में तब्दील हो गई।
    गंगा पुत्र' की मौत ने गंगा-घोटाला उजागर किया है
    उन्होंने कहा कि कुंभ के दौरान पहली बार ऐसा हुआ कि गंगा में मछलियां नहीं दिखी। उन्होंने कहा कि श्री श्री रविशंकर ने काफी बात की लेकिन यह नहीं बताया कि काशी विश्वनाथ कॉरीडोर की चौड़ाई बढ़ाने के लिए कई पुरातन मंदिरों को तोड़ा गया। श्री श्री रविशंकर पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मातृसदन में आकर स्वामी सानंद को श्रद्धांजलि न देने और उनके बलिदान का कहीं जिक्र तक नहीं करने से ही पता चलता है कि भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपरा से श्री श्री रविशंकर को कोई सरोकार नहीं। वह केवल सरकार की योजनाओं का महिमामंडन करने आए थे। शिवानंद ने कहा कि गंगा की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रहेगा। मालूम हो कि दस अप्रैल को श्रीश्री रविशंकर ने मातृसदन पहुंचकर आत्मबोधानंद से अनशन समाप्त करने के लिए कहा कि था।गंगा की अविरलता के लिए गंगा और सहायक नदियों से खनन बंद करने की मांग को लेकर मातृसदन कई साल से आंदोलन कर रहा है। इसके तहत भूख हड़ताल, जल त्याग भी मातृसदन में संत करते आए हैं। इन दिनों स्वामी शिवानंद के शिष्य आत्मबोधानंद तपस्या में हैं।  

    सरकार ने नमामि गंगे नामक रु. 20,000 करोड़ की परियोजना शुरू की हुई है जिसका आधे से ज्यादा पैसा रु. 11,176.81 करोड़ 117.87 करोड़ लीटर प्रति दिन सीवेज साफ करने की क्षमता वाले ट्रीटमेण्ट संयंत्र बनाने में खर्च होने वाला है किंतु सीवेज या शहरों से निकलने वाला गंदा पानी 290 करोड़ लीटर प्रति दिन है। जब तक हम तय क्षमता तैयार करेंगे तब तक सीवेज की मात्रा कई गुणा बढ़ चुकी होगी। अतः हम गंगा में गिरने वाले गंदे पानी को साफ करने की क्षमता के आस-पास भी नहीं हैं। अब कई लोग मानने लगे हें कि गंदे पानी का निस्तारण बिना नदी में डाले कैसे हो यह सोचना पड़ेगा। नदी यदि बहती रहे तो उसके अंदर खुद को साफ करने की क्षमता होती ही है जिस मांग को लेकर प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल ने अनशन किया और अपनी जान दी लेकिन जो बात नितिन गडकरी का मंजूर नहीं थी क्यांकि वे बांध बनाने पर रोक लगाने को तैयार नहीं हैं।

    अब तमाम विशेषज्ञ यह मानने लगे हैं कि दो वजहों से गंगा पर पनबिजली परियोजनाएं नहीं बननी चाहिए। एक अधय्यन बताता है कि 2013 की बाढ़ में सबसे ज्यादा नुकसान उत्ताखण्ड में उन जगहों पर हुआ जहां बांध बने हुए थे इसलिए बांध बनाना आपदा को न्यौता देने जैसा है। दूसरा गंगा का विशेष चरित्र कि उसका पानी सड़ता नहीं यह उसके अंदर मौजूद बालू के कणों में है। लेकिन यह तभी है जब पानी बहता रहे। रूके पानी में ये कण नदी के तल में बैठ जाते हैं। कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के मुताबिक 1965 में प्रति लीटर गंगा के पानी में कणों की मात्रा 8.92 मिलीग्राम होती थी जबकि वन विभाग का एक अध्य्यन बताता है कि 2016-17 में यह घट कर 4.68-5.52 मिलीग्राम रह गया है। यदि सरकार ने टिहरी बांध से पानी नहीं छोड़ा होता, जिसके कारण अचानक कई लोगों के घर व जमीनें डूब में आ गईं, तो इलाहाबाद, जो अब प्रयागराज बन गया है, के कुम्भ में इस बार डुबकी लगाने भर का भी पानी नहीं होता।

    यदि भाजपा की सरकार अपने किए वायदे के अनुसार गंगा को साफ करती तो भारत में रहने वाले 10 में से 4 व्यक्तियों को सीधा लाभ पहुंचता। लेकिन वह चुनाव आते ही अयोध्या में राम मंदिर की बात कर रही है जिसके बनने पर किसी का जीवन निर्भर नहीं है और शबरीमाला में तो वह सर्वोच्च न्यायालय के विरूद्ध जाकर बच्चे जनने की उम्र वाली महिलाओं के मंदिर प्रवेश का विरोध कर रही है। अच्छा होता यदि वह प्रतिगामी भूमिका लेने के बजाए जनहित वाला काम करती।

    भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उसे धर्म और पूंजीवादी विकास में चुनना हो तो वह किसे चुनेंगे। लेकिन यह बात नरेन्द्र मोदी के खिलाफ जा रही है। तुलसीदास ने रामचरितमानस में कहा है कि ’मुनि तापस जिन्ह तें दुःखु लहहीं। ते नरेश बिनु पावक दहहीं।।’ इसे इत्तेफाक ही कहा जाएगा कि जबसे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद और अब ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद आमरण अनशन पर बैठे हैं भाजपा और नरेन्द्र मोदी समस्याओं से घिर गए हैं।
    विजयारती 
    INITIATE NEWS AGENCY

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