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    बढ़ सकती है उषा वर्मा की मुश्किलें प्रमाण देने के बाद भी जिलाधिकारी ने नही की कोई कार्यवाही शिकायत कर्ता लेगा हाई कोर्ट की शरण


    हरदोई- उषा वर्मा ने जो शपथपत्र नामांकन के समय दाखिल किया था उसमें कई तथ्य छिपाए गए है जिसकी शिकायत  राजकुमार राठौर द्वारा 09/04/2019 को रिटर्निंग अधिकारी से की गई थी व साथ मे संबंधित आरोपो के प्रमाण भी सौपे गए थे 
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    बढ़ सकती है उषा वर्मा की मुश्किलें प्रमाण देने के बाद भी जिलाधिकारी ने नही की कोई कार्यवाही शिकायत कर्ता लेगा हाई कोर्ट की शरण
    लेकिन जिलाधिकारी द्वारा आरोप यह कह कर खारिज कर दिए गए थे कि शिकायत कर्ता पुकार कराने के बाबजूद भी उपस्थित नही हुआ जिस कारण शिकायत को खारिज किया जाता है।लेकिन एक बात समझ से परे है आखिर उन आरोपो के प्रमाण जो जिलाधिकारी को राजकुमार द्वारा सौपे गए थे उनकी जांच क्यो नही की गई।

    बढ़ सकती है उषा वर्मा की मुश्किलें प्रमाण देने के बाद भी जिलाधिकारी ने नही की कोई कार्यवाही शिकायत कर्ता लेगा हाई कोर्ट की शरण
    अगर की गई और आरोप निराधार थे तो संबंधित शिकायत कर्ता पर कार्यवाही क्यो नही की गई।जब कि आई0एन0ए0न्यूज़ द्वारा उषा वर्मा के ऊपर लगाए गए आरोपो के प्रमाण की जांच की गई तो आरोप बिल्कुल सही पाए गए।अब सवाल ये कि आखिर कार्यवाही किस के दवाब में नही की गई।और उषा वर्मा के लिए ये मुश्किल कोई नई नही है पिछले लोकसभा के चुनाव के दौरान ही कुछ महीने पहले भी 2013 में एक ठगी के मामले में उनके दिल्ली नार्थ एवेन्यू आवास से रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 60 लाख की ठगी करने का आरोपी दया किशन उनके दिल्ली के आवास से हरियाणा पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था।

    जिस कारण पूर्व सांसद को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ था।पहले तो पूर्व सांसद ने अभियुक्त को जानने से ही इनकार कर दिया था।लेकिन बाद में उन्होंने माना कि वो उसे जानती है।और इसी ठगी के मामले में एक अभियुक्त तो मदन पूर्व सांसद का ब्यक्तिगत सहायक था।इस प्रकरण में जब हरियाणा पुलिस ने पूर्व सांसद से पूछताछ करनी चाही तो वो अब तक हरियाणा पुलिस से पूछताछ से बच रही है।पूर्व में इस प्रकरण को लेकर कई प्रमुख समाचार पत्रों ने छापा भी था।लेकिन एक कहावत है कि जिसकी लाठी उसकी भैस 2013 में सपा सरकार होने के कारण मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।जब आई0एन0ऐ0न्यूज़ द्वारा शिकायत कर्ता से जब दूरभाष द्वारा ये पूछ गया कि आपत्ति दाखिल करने के बाद जिलाधिकारी द्वारा पुकार करवाने के बाद आप उपस्थित क्यो नही हुए तो शिकायत कर्ता का कहना था की उसे अपनी जान का खतरा था और जिलाधिकारी या उनके बिभाग द्वारा उसे कोई भी फोन नही किया न ही किसी प्रकार का कोइ संपर्क किया गया।जिस कारण ईमानदार जिलाधिकारी की कार्यशैली पर एक सवालिया निशान है।  

    सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर राजकुमार राठौर पर पूर्व में जिस जमीन पर प्रफुल्ल फिलिग स्टेसन पेट्रोल पंप बना है उस जमीन के विवाद को लेकर लूट की एफ0आई0आर0पूर्व सांसद द्वारा संडीला कोतवाली में लिखवाया गया था।शिकायत कर्ता  अब अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है।और जो तथ्य उषा वर्मा द्वारा शपथपत्र में छुपाये गए है उस शिकायत पर जिलाधिकारी द्वारा कार्यवाही न होने की दशा में शिकायत कर्ता अब हाई कोर्ट की शरण मे जाने के लिए मजबूर है।अब देखना ये दिलचस्प होगा कि ये तथ्यों को छिपाने की लड़ाई कहा तक जाती है।क्या उषा वर्मा का नामांकन पत्र रद्द किया जाएगा या नही।

    विजयारती 
    INITIATE NEWS AGENCY

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