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    जिला शुल्क नियामक समिति द्वारा स्कूलों की मनमानी पर रोक न लगाने से अभिभावकों में प्रशासन के प्रति फूट रहा गुस्सा


    हरदोई- दिनांक 31-03-2019  को अभिभावकों की एक बैठक अभिभावक संघ हरदोई के बैनर तले वैभव लान में संपन्न हुई, जिसमे सैकड़ों अभिभावकों ने भाग लिया तथा स्कूलों की मनमानी के विरुद्ध आवाज उठाई तथा प्रशासन को कोसते हुए अभिभावकों ने कहा कि जब उ० प्र० सरकार ने  स्ववित्त पोषित विद्यालय शुल्क विनियमन विधेयक 2018 लागू कर रखा है तथा स्पष्ट आदेश किये हैं कि हर जिले में एक जिला शुल्क नियामक समिति गठित हो तथा ये समिति सभी स्कूलों की फीस आदि पर आदेश के अनुरूप लागू करवाए तो हरदोई में गठित हुई ये समिति इन नियमों के अनुरूप विद्यालयों पर नकेल क्यों नहीं कस पा  रही है ?सभी अभिभावकों ने  मिलकर निम्न प्रमुख मांगे रखी हैं।
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    जिला शुल्क नियामक समिति द्वारा स्कूलों की मनमानी पर रोक न लगाने से अभिभावकों में प्रशासन के प्रति फूट रहा गुस्सा 
    १. उ० प्र० स्ववित्तपोषित विद्यालय शुल्क विनियमन विधेयक 2018 के अनुरूप जिला शुल्क नियामक समिति द्वारा अनावश्यक रूप से और नियम विरुद्ध शुल्क बढ़ाने वाले विद्यालयों की फीस वृद्धि पर रोक लगाई जाये और उन पर विधेयक के अनुरूप दण्ड लगाकर कठोर कार्यवाही की जाये।ज्ञात हो कि उक्त विधेयक में कोई भी निजी स्कूल केवल जिला शुल्क नियामक समिति  को अवगत कराकर ही फीस वृद्धि कर सकता है और ये वृद्धि  अधिकतम CPI(2.57%) + 5% तक ही मान्य है।

    २. विधेयक  के अनुसार कोई भी स्कूल किसी निर्धारित दुकान से स्कूल ड्रेस तथा किताबें आदि खरीदने पर बाध्य नहीं कर सकता है जबकि बाल विद्या भवन , सेंट जेवियर्स , सनबीम पब्लिक स्कूल  तथा अन्य कई स्कूल अभिभावकों को केवल बताई गई दुकान से ड्रेस और किताबें खरीदने पर बाध्य  कर रहें है अतः  उक्त विद्यालयों पर कार्यवाही कर के इस पर त्वरित रोक लगाई जाये।

    ३. विधेयक के अनुसार कोई भी प्राइवेट विद्यालय केवल एक बार ही प्रवेश शुल्क ले सकता है जबकि सेंट जेवियर,न्यू सनबीम  स्कूल , यूनाइटेड पब्लिक स्कूल,लाईट एंड कल्चर हिल्स तथा अन्य कई स्कूल पुनः प्रवेश शुल्क ले रहे हैं   जिन पर तुरंत रोक लगाई जाये। ४. बसों की फीस वृद्धि पर रोक लगाई जाये क्योंकि प्रत्येक स्कूल ने पिछले वर्ष बसों की फीस में वृद्धि की थी और कई स्कूल इस वर्ष पुनः बस फीस में बढोत्तरी करके अभिभावकों की जेब पर डाका डाल रहें जबकि डीजल या टैक्स आदि में किसी प्रकार की बढोत्तरी नहीं हुई है।  

    ५. विधेयक द्वारा साफ़ कहा  गया है कि कोई भी स्कूल फीस नगद न लेकर बैंक अथवा डिजिटल माध्यम से लेगा और अभिभावक को इसकी पक्की रसीद देगा। किन्तु सेंट जेवियर तथा अन्य कई छोटे स्कूल फीस नकद में लेकर अभिभावक को कोई पक्की रसीद भी नहीं देते है इस पर रोक लगाई जाये।

    ६. उ० प्र० स्ववित्तपोषित विद्यालय शुल्क विनियमन विधेयक 2018 में स्पष्ट किया गया है कि सभी स्कूल अपनी फीस व कोर्स की किताबों का ब्यौरा ६० दिन पूर्व  स्कूल की वेबसाइट व नोटिस बोर्ड पर प्रदर्षित करेंगे लेकिन किसी भी स्कूल ने ऐसा नहीं किया और अभिभावकों को आनन फ़ानन किताबों की लिस्ट पकडाकर भिन्न भिन्न प्रकाशकों की पुस्तकें लेने को बाध्य कर रहे हैं जिन पर मोटी कमीशनखोरी हो रही है।७. सीबीएसई के मानकों के अनुसार केवल  एनसीआरटी की ही किताबें मान्य हैं परन्तु स्कूल अपने चहेते प्रकाशकों की किताबें अभिभावकों को लेने को बाध्य कर रहें हैं।

    ८. समस्त किताबें व अन्य स्टेशनरी बिना GST के  कच्चे बिल के साथ बेची जा रही है इस पर त्वरित रोक लगाई जाये।आये हुए सभी  अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की कि उक्त समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाये नहीं तो अभिभावक धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे ।बैठक में अभिभावक संघ के संरक्षक राकेश पाण्डेय , शिव प्रकाश त्रिवेदी तथा अध्यक्ष गोपाल द्विवेदी समेत दानिश किरमानी,कुलदीप द्विवेदी , अभिषेक गुप्ता ,अमिताभ शुक्ला,आनंद  गुप्ता, सी वी यादव ,जीतू दीक्षित ,अमित पाल तथा अन्य सैकड़ों  अभिभावक उपस्थित रहे।

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