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    सवर्ण आरक्षण

                                    सवर्ण आरक्षण 
    सवर्ण आरक्षण अच्छा विचार है लेकिन केवल आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण  को ही सरकारी नौकरी और उच्च शिक्षा में आरक्षण का फायदा मिल सकेगा क्या यह हास्यपद नही कितने सवर्ण युवा है।

    जिनकी वार्षिक आय आय 8 लाख रुपए से कम होगी?
    5 एकड़ से कम कृषि भूमि वाले युवा तो मिल सकेंगे लेकिन 200 वर्ग से 200 गज वर्ग से कम भूख गैर अधिसूचित भूखंड वाले युवा ही लाभ ले सकेंगे।  इन सब से अलग सवर्ण युवा आगे भी शोषित होगा। मुझे बेहद दुख होता है जब कर्ज ले कर माता पिता बच्चो को पढाते हैं और वे बेरोजगारी की मार झेलते हैं। खैर एक अच्छा कदम है। मै इस का स्वागत करती हूँ। अगर हम पीछे देखें तो पाएंगे की पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने अपने कार्यकाल में अगड़ी जातियों के लिए 10 फ़ीसदी आरक्षण की व्यवस्था की थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने इसे ख़ारिज कर दिया था। इस लिए अब इंतजार है कि इस आरछण के पर्स्ताव को अनुमति मिलेगी और ये जल्दी लागू किया जाए।यह हम सभी जानते है कि हालिया फ़ैसला चुनाव को दिमाग़ में रखकर लिया गया है..आज अगर संविधान संशोधन बिल पास भी हो जाए तब भी इसे चुनौती दी जा सकती है और इसे रद्द कराया जा सकता है...इस लिए जब तक प्रभाव मे न लाया जाए कुछ भी कहना मुश्किल है।
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    सवर्ण आरक्षण
    मेरे हिसाब से यह चुनावी मौसम का असर है जो भी है सवर्ण युवा अभी सुखद भविष्य के सपने देख रहा है।  सवर्ण आरक्षण अच्छा विचार है लेकिन केवल आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण  को ही सरकारी नौकरी और उच्च शिक्षा में आरक्षण का फायदा मिल सकेगा ...क्या यह हास्यपद नही कितने सवर्ण युवा है,जिनकी वार्षिक आय आय 8 लाख रुपए से कम होगी?

    5 एकड़ से कम कृषि भूमि वाले युवा तो मिल सकेंगे लेकिन 200 वर्ग से 200 गज वर्ग से कम भूख गैर अधिसूचित भूखंड वाले युवा ही लाभ ले सकेंगे।  इन सब से अलग सवर्ण युवा आगे भी शोषित होगा। मुझे बेहद दुख होता है जब कर्ज ले कर माता पिता बच्चो को पढाते हैं और वे बेरोजगारी की मार झेलते हैं। खैर एक अच्छा कदम है। मै इस का स्वागत करती हूँ। अगर हम पीछे देखें तो पाएंगे की पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने अपने कार्यकाल में अगड़ी जातियों के लिए 10 फ़ीसदी आरक्षण की व्यवस्था की थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने इसे ख़ारिज कर दिया था। इस लिए अब इंतजार है कि इस आरछण के पर्स्ताव को अनुमति मिलेगी और ये जल्दी लागू किया जाए।

    यह हम सभी जानते है कि हालिया फ़ैसला चुनाव को दिमाग़ में रखकर लिया गया है..आज अगर संविधान संशोधन बिल पास भी हो जाए तब भी इसे चुनौती दी जा सकती है और इसे रद्द कराया जा सकता है...इस लिए जब तक प्रभाव मे न लाया जाए कुछ भी कहना मुश्किल है।

    भावना वरदान शर्मा 

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