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    गांधी की याद में एक मिनट का मौन उन्हें दी सच्ची श्रद्धांजलि



    क्या मोहनदास करमचंद गांधी आज के दौर में प्रासंगिक हैं? या फिर महात्मा का सम्मान (जो गांधी ने खुद कभी नहीं चाहा था) मोहनदास करमचंद गांधी के व्यक्तित्व पर हावी हो गया है? वह गांधी थे, जिन्होंने दुनिया को सत्याग्रह का शक्तिशाली हथियार दिया और 'अहिंसा' के सोच को चिरायु बना दिया। 

    स्वतंत्र भारत में रहते हुए और गणतंत्र के 70 वर्ष की परंपरा का सम्मान करते हुए, क्या महात्मा गांधी का नाम हमारे लिए कोई महत्व रखता है? या यह सिर्फ हम 2 अक्टूबर उनकी जयंती या फिर 30 जनवरी, जिस दिन आज से 71 वर्ष पूर्व दिल्ली में उनकी हत्या कर दी गई थी, केवल उसी दिन उन्हें याद करते हैं?

    देश और राष्ट्रीय राजधानी में हम गांधी की शहादत की 71वीं पुण्यतिथि मना रहे हैं, दुर्भाग्य से, ऐसे कई हैं, जो उस वास्तविक जगह के बारे में नहीं जानते हैं जहां, 30 जनवरी 1948 को इतिहास की सबसे जघन्य हत्या हुई थी।
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    गांधी की याद में एक मिनट का मौन उन्हें दी सच्ची श्रद्धांजलि
    नंबर 5, तीस जनवरी मार्ग, जिसे पहले अलबुक्वेरक्यू रोड के रूप में जाना जाता था, उसकी कई लोगों के लिए कोई महत्ता नहीं होगी या काफी कम महत्ता होगी, जो कि अति व्यस्त होटल क्लारिजेज के पीछे है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है लोग प्राय: इस जगह के बारे में लक्ष्मी नारायण मंदिर (बिरला मंदिर) को लेकर भ्रम की स्थिति में आ जाते हैं। इमारत जिसे आज गांधी स्मृति कहा जाता है, यह वही जगह है, जहां महात्मा गांधी ने अपने जीवन के अंतिम 144 दिन बिताए थे।

    कलकत्ता (अब कोलकाता) से 9 सितंबर 1947 को उनके वापस आने के बाद गांधी सीधे बिरला हाउस (आज गांधी स्मृति) पहुंचे थे। दिल्ली आने के दौरान वह प्राय: हरिजन बस्ती अथवा दिल्ली के पंचकूला रोड स्थित हरिजन वाल्मीकि मंदिर में ठहरते थे। हालांकि 1947 में विभाजन के बाद पश्चिम पंजाब के शरणार्थियों ने यह बस्ती हथिया ली और यहां रहना गांधी की सुरक्षा के लिए खतरा बन गया।

    सरकार ने 1971 में बिरला हाउस का अधिग्रहण किया था और इसे एक राष्ट्रीय स्मारक में बदल दिया गया। इसे 15 अगस्त 1973 को इसे देश को समर्पित कर दिया गया।

    लुटियंस स्टाइल के इस बंगले में गांधी एक छोटे कमरे में रहते थे, जो स्वतंत्रता बाद कई महत्वपूर्ण गतिविधियों का गवाह बना। सांप्रदायिक दंगों के दौरान, गांधी ने यहां अनिश्चिकाल के लिए अनशन करने का निर्णय लिया, जिसके बाद सभी समुदायों की ओर से आश्वासन मिलने के बाद ही उन्होंने अपना अनशन मौलाना अबुल कलाम आजाद द्वारा दिए गए संतरे के जूस पीकर तोड़ा।

    गांधी स्मृति के संस्मरण में एक कमरा भी है जहां महात्मा गांधी रहा करते थे और एक प्रार्थनास्थल है जहां हर शाम लोग जुटते थे। यह वही जगह है जहां मौजूद शहीद स्तंभ में उनके कहे अंतिम शब्द 'हे राम!' को उकेड़ा गया है। 

    गांधी स्मृति आज न केवल धरोहर स्थल है, बल्कि यह सभी आयुवर्गो खासकर बच्चों के लिए शैक्षणिक केंद्र भी है।

    विजयारती 
    INA न्यूज़ 

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