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    आगरा में बही गीतों की काव्यधारा


    आगरा- ब्रज भूमि आगरा में आदर्श सेवा संस्थान के द्वारा आयोजित 'गीतोत्सव' सफलतापूर्वक संपन्न हुआ,ज्योत्सना के मधुर कंठ से माँ वाणी की वंदना ने कार्यक्रम स्थल को पावन कर दिया। 

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    आगरा में बही गीतों की काव्यधारा
    गीतों के युवा हस्ताक्षर स्वयं वास्तव ने 'इस दीवाली आप गृहलक्ष्मी किसी आँगन की हों...' गीत से गीतोत्सव का आगाज़ किया,आगरा की प्रख्यात कवियित्री,रुचि चतुर्वेदी के गीत 'कभी अनसुनी सी कोई धुन बजेगी, मेरे गीत भी याद आने लगेंगे...' पर हमेशा की तरह श्रोताओं और कवियों का मन मोह लिया,कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ कवि,रामेंद्र मोहन त्रिपाठी रहे,विजय प्रकाश भारद्वाज के सुमधुर गीत मन को छू गए। कार्यक्रम में आमंत्रित बाकी कवि एवं कवियित्री,दीदी यशोधरा 'यशो', अंकिता कुलश्रेष्ठ,अमरनाथ 'ललित',धीरज मिश्र, आदर्श सिंह 'निखिल, सिद्धांत दीक्षित,शिवम 'खेरवार',ग़ज़ल के नए हस्ताक्षर,अनुज दीपांशु सिंह,ललिता करमचंदानी,ज़नाब खान,राशिद व मान सिंह 'मनहर' ने काव्यपाठ किया।

    कार्यक्रम में सुधी स्रोता के रूप में उपस्थित हरविंदर सिंह,पुनीता पचौरी,पूनम भार्गव ज़ाकिर,भरत दीप,उमेश भारती (दिव्यागं पत्रिका दर्पण परिवार) एवं अन्य सभी गुणीं जनों का हार्दिक आभार, कार्यक्रम का संचालन धीरज मिश्र जी एवं संयोजन शिवम खेरवार ने किया ।

    विजय लक्ष्मी सिंह "वैदेही"

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