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    मेरी जमानत को चुनौती देने वाली याचिका अविचारणीय : थरूर

    नई दिल्ली, 25 सितम्बर- कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि उनकी अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए दाखिल की गई याचिका विचारणीय नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ता की इसमें कोई अधिस्थिति ही नहीं है। 

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    मेरी जमानत को चुनौती देने वाली याचिका अविचारणीय : थरूर
    थरूर के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने न्यायमूर्ति आर.के. गौबा को बताया कि जमानत को चुनौती देने वाली याचिका विचारणीय नहीं है, क्योंकि कानून ने आरोपी को गिरफ्तारी के डर से अग्रिम जमानत लेने का अधिकार दिया है और सत्र न्यायालय के पास इससे निपटने का अधिकार है।

    अदालत अधिवक्ता दीपक आनंद की याचिका पर सुनवाई कर रही है। आनंद ने सत्र न्यायालय द्वारा पांच जुलाई को थरूर को दी गई अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के लिए याचिका दाखिल की है। थरूर पर अपनी पत्नी सुनंदा पुष्कर को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।

    दिल्ली पुलिस ने हालांकि याचिका का समर्थन किया है, लेकिन याचिका दाखिल करने पर याचिकाकर्ता की स्थिति को लेकर सवाल उठाया है।दिल्ली पुलिस के वकील राहुल मेहरा ने कहा, "मैं उसका समर्थन कर रहा हूं, बशर्ते उसे अपनी स्थिति साबित करनी होगी।

    मेहरा ने दावा किया कि थरूर का आवेदन कानून के तहत दाखिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा थरूर को पहले मजिस्ट्रेट अदालत जाना चाहिए था, जिसने उन्हें बतौर आरोपी समन जारी किया था और फिर जमानत मांगनी चाहिए थी।अदालत ने मामले को नौ अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।

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