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    मानस में श्री राम चरित्र मर्यादित जीवन जीने की कला सिखाती है- जितेंद्री जी महाराज

    हरदोई 19 सितंबर- अपने लिए तो सभी जी लेते हैं, दूसरों के लिए जी कर जीवन सुंदर बनाने की निधि मानस है। भगवान राम ने समाज में एकरूपता लाने हेतु त्याग कर दूसरों के लिए ही जीवन खपा कर रामराज की अवधारणा का सुंदर उदाहरण पेश किया। वही श्री कृष्ण जी ने अप्रतिम लीलाओं के माध्यम से कर्म योग का संदेश दिया। समाज में हर ,एक दूसरे के पूरक है ।जहां बायां हाथ शौच क्रिया के उपयोग में है वही दाहिना हाथ यज्ञ कर्म करने की संपूरक में है। हर एक की समाज में एक दूसरे की आवश्यकता है।" उक्त उद्गार मानस अमृत सेवा संस्थान की ओर से श्री राम जानकी मंदिर परिसर में चल रही मानस कथा के चौथे दिन मानस मर्मज्ञ आचार्य जितेन्द्री जी महाराज ने व्यक्त किए। 

    मानस में श्री राम चरित्र मर्यादित जीवन जीने की कला सिखाती है- जितेंद्री जी महाराज


    श्री राम जानकी मंदिर परिसर में चल रही मानस कथा के चौथे दिन जितेंद्री जी महाराज ने शिव विवाह और राम जन्म व कृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान राम के जन्मोत्सव की चर्चा करते हुये आचार्य जितेन्द्री जी महाराज ने कहा कि अच्छा जीवन जीना ही महोत्सव है। अपने लिये तो सभी जीते है अपने साथ दूसरो के लिये कुछ करना सीखे, ऐसा जीवन बनाये। राम जन्म महोत्सव नई दिशा को प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि जीवन को सुखमय बनाने के लिये पश्चिमी सभ्यता को त्यागकर अपनी भारतीय परम्परा को अपने जीवन में उतारे। उन्होंने कहा कि समाज में  सब एक दूसरे के पूरक हैं। हर एक को एक दूसरे की आवश्यकता पड़ती है।  जहां बायां हाथ शौच क्रिया  में भी उपयोगी है वही दायां हाथ यज्ञ कर्म करने के लिए भी उपयोगी है। समाज में  इसलिए हर वर्ग का कर्मों का प्रतिनिधित्व करते हुए  हर एक दूसरे की कार्यों की पर पूर्ति के लिए आवश्यक हैं। समतामूलक समाज की स्थापना में यही मूल अवधारणा भी है।कथा के दौरान आचार्य जी ने एक भजन ‘‘जनम लियो रघुरइया,अवध में बाजे बधईया’’ सुनाया तो पण्डाल में मौजूद सैकड़ों लोग झूमने लगे। उसके बाद राम जन्म के समय एक भजन ‘‘सब देव चले महादेव चले लय लय फूलन के हार ’’ सुनाया। भगवान के जन्मोत्सव की खुशी में कथा पण्डाल गुब्बारो, टाफी व बच्चों के खिलौनों से सजाया गया। जीवन जीने की लीला युक्त कला श्री कृष्ण का जन्म अद्भुत लीलाओं से युक्त है। कला युक्त कर्म करते रहने की प्रेरणा का परिचायक है लीलाधारी श्रीकृष्ण जी का जन्म।

    कथा से पूर्व मानस मर्मज्ञ श्री महाराज ने  पत्रकारों से मुखातिब  होते हुए कहा कि मानस अमृत सेवा संस्थान समाज के उन जरूरतमंद कन्याओं का विवाह करके पैर पूजी  करना चाहता है ।25 कन्याओं के विवाह भी श्री राम जी की कृपा से करा चुके हैं। शीघ्र आगामी समय पर 5 विवाहों को संपन्न कराया जाएगा।उन्होंने कहा कि कोई निर्धन नहीं है। निर्धनता के कारण कन्याएं अविवाहित नहीं रह सकती। उनके पद स्थिति के अनुसार कल्याणकारी मानव पैर पूजी के लिए तैयार रहता है। कन्याओं का कन्यादान सिर्फ माता पिता ही करते हैं हम सभी ऐसी कन्याओं का सिर्फ पैर पुजी करते हैं।* संयोजक व्यवस्थापक मुकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि मानस कथा 24 सितंबर तक चलेगी ।व्यास पूजन में मुकेश कुमार गुप्ता, राजू साईं, संदीप बूंदी वाले, राधेश्याम गुप्ता, सौरभ गुप्ता बताशा वाले व रवि मौजूद रहे। कथा में मानस अमृत सेवा संस्थान के संरक्षक जय कृष्ण शुक्ला,धर्मराज, अनुज शुक्ला, विजय पाल, पुष्पा द्विवेदी,पूनम द्विवेदी, प्राची दीक्षित,अभिषेक दीक्षित आदि लोग मौजूद रहे।

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