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    बच्चों के लिए 'मेडिटेशन' जरूरी : गुरुजी ईशान शिवानंद


    नई दिल्ली, 14 सितंबर - आज के हाईटेक और भाग-दौड़ भरी जिंदगी में, हम सहज ही अति उत्तेजना का शिकार हो जाते हैं। हमारी व्यस्त जिंदगी हमें केवल आगे बढ़ने का संकेत देती है। इसके अलावा हमारे हाथ में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हमें अलग-अलग डिजिटल दिशा की ओर ले जाते हैं, जहां आंतरिक शांति हमारे लिए बहुत जरूरी हो जाती है। एक वयस्क के रूप में यह हमारे लिए सच्चाई है, इसलिए बच्चों के बारे में सोचिए, वे अपने अभिभावकों और जिस माहौल में रहते हैं, वहां की ऊर्जा ग्रहण करते हैं। उसके बाद हम उन्हें स्कूल भेजते हैं, जहां उनसे उम्मीद की जाती है कि वे ध्यान केंद्रित करें। 


    हम सभी अपने बच्चों को प्यार करते हैं और उनके लिए बेहतर करना चाहते हैं। इसलिए हम उस युक्ति पर विचार क्यों नहीं करते जो उन्हें सचेत रखें और दुनिया की सारी मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार करे?

    मेडिटेशन (दिमागी अभ्यास) एक बेहतरीन तरीका है। यह हमें मौजूदा समय में रहने की शिक्षा देता है, ताकि हम प्रयास करने के बेहतर प्रबंध के साथ अच्छे समय का आनंद उठा सकें। यह हमें हमारे सच्चे भाव के साथ जुड़े रहने में मदद करता है। अध्ययन का संबंध ध्यान को मौजूदा समय में एकाग्रचित करने से है, जो हमारी बेहतर एकाग्रता, ध्यान केंद्रित करने और स्मरणशक्ति को बढ़ाने में मदद करता है।

    इस संबंध में गुरुजी ईशान शिवानंद ने मीडिया से कहा, "ग्रहणशील अतिभार और स्कूल, परिवार व आंतरिक दबाव की दुनिया में बच्चों को वयस्कों जितना ही मेडिटेशन की जरूरत है। मेडिटेशन बच्चों में ध्यान विकसित करने, उन्हें अपनी भावनाओं पर काबू रखने और यह सिखाने में कि कैसे अपने अंदर और बाहर ध्यान देना है, में मदद करता है। यह उनमें केंद्र का भाव उत्पन्न करता है।"

    उन्होंने आगे कहा, "बच्चों के लिए विशेष रूप से तैयार मेडिटेशन जैसे सोल रिवाइवल (आत्मा पुनरुद्धार) उन्हें एकाग्र करने में मदद करते हैं, ताकि वे अपने अध्ययन में अच्छी तरह ध्यान लगा सकें। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि मेडिटेशन ने छात्रों के अकादमिक और खेल के क्षेत्र में प्रदर्शन में सुधार लाने में मदद की है।"

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