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    एससी के आदेश का पालन


    माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर देशभर में गैर सरकारी वाहनों पर नेम प्लेट लगाना प्रतिबंधित किया है। जिसको लेकर प्रदेश सरकार ने गम्भीरता लेते हुए उच्च अधिकारियों को दिशानिर्देश देते हुए आदेश का पालन कराने की हिदायत दी है। 

    कृष्ण कुमार वीके (एसएसपी हरिद्वार)
    कृष्ण कुमार वीके (एसएसपी हरिद्वार)

    हरिद्वार जनपद में मित्रपुलिस ने कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए चैकिंग अभियान चलाया जिसमे कई गैर सरकारी वाहनों के चालान काटे गए। इस दौरान पुलिसकर्मियों की तीख़ी नोकझोंक भी हुई। 

    रूड़की शहर में पुलिसकर्मी जब वाहनों से नेम प्लेट और स्टिंगर उतार रहे थे तभी एक वाहन ऐसा भी आया जिसपर आर्मी का स्टिंगर लगा था, और उसमें आर्मी के दो जवान यूनिफॉर्म में मौजूद थे। 

    इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने उक्त वाहन को रोका और स्टिंगर उतारते हुए चालान काटा जिसपर आर्मी जवान और पुलिसकर्मियों की काफी नोकझोंक हुई। 

    आपको बता दे कि प्रदेश में गैर सरकारी वाहनों पर नेम प्लेट लगाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। सरकारी अधिकारी भी निजी वाहनों पर अपने नाम या कार्यालय से संबंधित प्लेट नहीं लगा सकेंगे। अगर कोई प्रतिबंध का पालन नहीं करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

    हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर जारी निर्देशों के अनुपालन में शासन ने यह निर्णय लिया है।

    शासनादेश में कहा गया कि वाहनों के नंबर प्लेट पर पंजीयन संख्या के अतिरिक्त कुछ भी अंकित किया जाना दंडनीय अपराध है। प्रवर्तन की कार्रवाई के दौरान यह देखा गया है कि निजी वाहनों, टैक्सी एवं किराए के वाहनों पर रजिस्ट्रेशन नंबर के अतिरिक्त लोग प्लेट पर पद नाम, संगठन का नाम, के पद, संस्था, प्रतिष्ठान का नाम आदि अंकित करा लेते हैं। 

    उत्तराखंड सरकार की मुहर, चिन्ह का नियम विरुद्ध प्रयोग किया जा रहा है। इससे प्रशासनिक अव्यवस्था और दुरुपयोग की संभावना रहती है। 

    अगर किसी वाहन पर नीली बत्ती लगी है और उसमें उच्च पदस्थ व्यक्ति नहीं है तो इसे काले कपड़े से ढंक दिया जाएगा। आदेश में स्पष्ट है कि दोषी के खिलाफ केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 के प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    शासन या सरकारी अधिकारी की श्रेणी

    श्रेणी (क) फ्लैशर युक्त पीली बत्ती (जब तक यान राज्य में कहीं ड्यूटी पर हो)
    :-अपर मुख्य सचिव, औद्योगिक विकास आयुक्त, आयुक्त वन एवं ग्राम्य विकास, प्रमुख सचिव, सचिव, पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक, मंडलायुक्त, परिवहन आयुक्त, आबकारी, व्यापार कर आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, परिक्षेत्रीय पुलिस उप महानिरीक्षक,

    श्रेणी (ख) फ्लैशर युक्त नीली बत्ती (सिर्फ ड्यूटी के समय)
    जनपद न्यायाधीश, उच्च स्तर न्यायिक सेवा के अधिकारी, डीएम, सीडीओ, एसएसपी, एसपी, एएसपी, सीओ, तहसीलदार, प्रवर्तन ड्यूटी के दौरान सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, जिला आबकारी, और व्यापार कर अधिकारी तथा वन विभाग के सिर्फ प्रवर्तन अधिकारी।

    उत्तराखंड, रूड़की से प्रवेज आलम की रिपोर्ट 


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