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    हैरतअंगेज : फर्जी पैथ लैब ने कर डाली 25 हजार लोगों की जांच


    उत्तर पश्चिम दिल्ली के महेंद्रा पार्क इलाके में दो भाइयों ने फर्जी पैथोलॉजी लैब खोलकर करीब 25 हजार लोगों की सेहत की जांच कर डाली। उन्हें फर्जी रिपोर्ट भी दे दी। जांच में खुलासा होने के बाद पुलिस ने दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है।


    अपहरण की सूचना थी : पुलिस को 17 अप्रैल को सूचना मिली थी कि सराय पीपलथला इलाके में सीबीआई अफसर बन कर आए कुछ लोगों ने संजय नाम के एक युवक का अपहरण कर लिया है। पुलिस मौके पर पहुंची तो पता चला कि संजय वहां यूनिकेयर पैथ सॉल्यूशंस में काम करता है। यह लैब उसके ममेरे भाई अजय का है। पुलिस वहां के हालात देखकर हैरान रह गई। एक छोटे से बदबूदार कमरे में संचालित हो रही इस लैब में तमाम लोगों की रिपोर्ट बनाई जा रही थी।

    ऑनलाइन देते थे रिपोर्ट : लैब के कर्मचारियों ने दावा किया कि उनसे चार डॉक्टर जुड़े हुए हैं, जिनके नाम पर वह ऑनलाइन रिपोर्ट देते हैं। शक होने पर पुलिस ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) और दिल्ली मेडिकल कॉउंसिल से इस लैब से जुड़े डॉक्टरों की जानकारी मांगी। दोनों संस्थाओं ने बताया कि कोई भी डॉक्टर इससे नहीं जुड़ा है। इसके बाद पुलिस ने 23 अप्रैल को धोखाधड़ी और लोगों की सेहत से खिलवाड़ से जुड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। .
    पैसे निकालते ही पकड़े गए : पुलिस दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही थी। इस बीच लैब के बैंक खाते से गुरुग्राम में रुपये निकाले जाने की सूचना मिली।

    पुलिस ने दबिश देकर गुरुग्राम से अजय को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ के बाद एक मई को संजय को भी वाराणसी से गिरफ्तार कर लिया गया

    पूरी दिल्ली में फैला था नेटवर्क
    दिल्ली में आने के बाद अजय ने वेबसाइट बनाई और सस्ती दरों पर कूरियर के माध्यम से नमूने मंगाने लगा। पूरी दिल्ली में उसका नेटवर्क फैला था। तमाम पैथ लैब सस्ते के चक्कर उसे नमूने भेजती थीं।

    अजय वाराणसी में दस साल पैथ लैब में काम कर चुका है। इससे उसे इस पेशे के बारे में अच्छी जानकारी है। वह वाराणसी के डॉक्टर संजय मेहता के नाम का भी इस्तेमाल उनकी जानकारी के बगैर कर रहा था।

    गिरफ्तार आरोपियों ने दावा किया है कि अब तक इन्होंने 25 हजार लोगों के स्वास्थ्य के जांच की फर्जी रिपोर्ट वेबसाइट के माध्यम से भेजी हैं।

    भाई को फंसाने के लिए रची साजिश
    जांच में यह भी सामने आया कि अजय से रुपये वसूलने के लिए संजय ने अपने अपहरण की कहानी गढ़ी थी। उसे लगता था कि सीबीआई अधिकारी के नाम पर अजय से वह रुपये वसूल लेगा। लेकिन पुलिस को जानकारी मिलने के बाद परत दर परत खुलती चली गई और संजय ने पूरी कहानी बयां कर दी।

    उत्तराखंड से सैयद उवैस अली

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