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    उप्र : वैकल्पिक उर्जा स्रोत से कार्बन उत्सर्जन कम करेगा रेलवे


    लखनऊ, 6 अप्रैल - वैकल्पिक उर्जा स्रोत के बेहतर इस्तेमाल को लेकर अब भारतीय रेलवे ने भी कदम बढ़ा दिए हैं। रेलवे के अधिकारियों का दावा है कि पूर्वोत्तर रेलवे सोलर प्लांट के साथ ही एलईडी लाइटस के जरिए करोड़ों रूपये बचाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने का पूरा खाका तैयार कर चुका है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रेलवे इसके जरिए खुद के लिए बिजली पैदा करने के साथ ही दूसरों को भी बिजली मुहैया कराएगा। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सोलर प्लांट से इस वित्तीय वर्ष लगभग 33 लाख यूनिट बिजली की बचत करने का लक्ष्य है। 


    अधिकारी ने बताया कि पूर्वोत्तर रेलवे के लगभग 400 स्टेशनों पर एलईडी लाइटस लगा दी गई हैं। इससे करीब 33 लाख यूनिट बिजली की बचत होगी। इससे रेलवे को सलाना लगभग ढाई करोड़ रूपये से अधिक की बचत होगी। 

    पूवरेत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी संजय यादव के मुताबिक एनईआर में केवल एलईडी लाइटस लगने से ही एक वर्ष में 28 लाख किलोग्राम कार्बन का उत्सर्जन कम होगा। यह रेलवे की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। क्योंकि दुनिया कार्बन के अधिक उत्सर्जन से परेशान है। लेकिन एनईआर अकेले इतने बड़े पैमाने पर कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में कामयाब होगा। 

    उन्होंने बताया कि रेलवे खुद के लिए बिजली बनाने के साथ ही बडे स्टेशनों की छतों का इस्तेमाल सोलर पावर प्लांट के रूप में करने का खका तैयार कर चुका है। स्टेशनों की छतों पर ग्रिड कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट लगेंगे और इससे पैदा होने वाली बिजली स्टेशनों के लिए काम आएगी। 

    रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक ग्रिड से कनेक्ट होने की वजह से अतिरिक्त बिजली का इस्तेमाल अन्य क्षेत्रों में की जाएगी। इसके बदले रेलवे को राजस्व भी मिलेगा। पूर्वांचल के सबसे बड़े स्टेशनों में से एक गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर ग्रिड कनेक्टेड सोलर प्लांट जल्द ही लगने की संभावना है। 

    एनईआर के अंतर्गत आने वाले लखनऊ जंक्शन सहित कई अन्य स्टेशनों पर सोलर प्लांट लगाने का खाका तैयार हो चुका है। 

    गौरतलब है कि अभी तक एनईआर में 1,880 केडब्लयूपी क्षमता का ग्रिड कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट वाराणसी के इज्जतनगर में लगाया जा चुका है। 


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