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    प्रदेश में भंग चल रहे उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के लिए एक जनहित याचिका दायर

    बांगरमऊ उन्नाव - उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ के वरिष्ठ अधिवक्ता तथा यश भारती सम्मान से सम्मानित फारूक अहमद एडवोकेट ने प्रदेश में भंग चल रहे उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के लिए एक जनहित याचिका दायर की थी जिसकी सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से दो सप्ताह में जवाब दाखिल करके बताने को कहा कि आयोग का गठन अभी तक क्यों नहीं किया गया तथा आयोग के गठन में सरकार क्या कार्यवाही कर रही है।

          मालूम होना चाहिए कि वर्ष 1996 में उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम पारित किया था। जिसके बाद पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया था जिसमें 1 अध्यक्ष तथा 4 सदस्यों का प्रावधान किया था जिसका कार्यकाल 3 वर्ष निर्धारित किया गया था। वर्ष 2007 में उत्तर प्रदेश सरकार ने अधिनियम में संशोधन करके आयोग में 1 अध्यक्ष, 2 उपाध्यक्ष तथा 17 सदस्यों का प्रावधान किया और आयोग का कार्यकाल 3 वर्ष से घटाकर 1 वर्ष कर दिया।

           मार्च 2017 में वर्तमान सरकार का गठन हुआ था। 28 जून 2017 को पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष एवं दोनों उपाध्यक्ष तथा 17 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया था। उसके बाद से उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी तक इस आयोग का गठन नहीं किया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन न करने पर उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ के वरिष्ठ अधिवक्ता तथा यश भारती सम्मान से सम्मानित फारूक अहमद एडवोकेट ने 8 मार्च 2018 को उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ में एक जनहित याचिका दायर की। जिसकी आज सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ व जस्टिस अब्दुल मोईन की डबल बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थाई अधिवक्ता रमेश पांडेय को निर्देशित किया कि उत्तर प्रदेश सरकार 2 सप्ताह में जवाब दाखिल करें और बताए कि 28 जून 2017 से भंग पड़े इस आयोग का गठन क्यों नहीं किया गया और यह भी सरकार बताएं कि उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के लिए क्या कार्यवाही कर रही है।

    उन्नाव से मुकेश कुमार की रिपोर्ट 

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