Header Ads

  • INA BREAKING NEWS

    सृष्टि की रचना का उत्सव है भारतीय हिंदू नववर्ष


    नई दिल्ली, 17 मार्च - भारतीय पंचांग में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नए साल का आरंभ माना जाता है, जिसे हिंदू नववर्षोत्सव भी कहा जाता है। यह गणना विक्रम संवत के अनुसार है, जो ईसा पूर्व 57 में आरंभ हुआ था। विक्रम संवत 2075 रविवार को आरंभ हो रहा है। लेकिन शास्त्रों के मुताबिक भगवान ब्रह्मा ने चैत्र शुल्क प्रतिपदा को ही सृष्टि की रचना की थी और कलयुग का आरंभ भी इसी दिन हुआ था। इसलिए यह सृष्टि की रचना का उत्सव है। 

    युगादि पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही मनाया जाता है। वैसे व्यापारिक व फसली वर्ष के मुताबिक पूरे भारत में अलग-अगल त्योहारों के साथ नया साल मनाने की परंपरा है। लेकिन वैदिक काल से चली आ रही काल गणना पद्धति के मुताबिक, चैत्र में ही वर्ष का आरंभ माना जाता है क्योंकि इस महीने में प्रकृति में नूतनता का संचार होता है। 

    भारतीय महीनों के नामकरण को लेकर भी एक विधान है कि जिस महीने की पूर्णिमा के दिन जो नक्षत्र होता है उसी के नाम पर उस महीने का नाम होता है। चूकि चैत्र महीने में पूर्णिमा के दिन चित्रा नक्षत्र रहता है इसलिए महीने का नाम चित्रा है। 

    संस्कृत के प्रोफेसर देवानंद झा ने कहा कि वैदिक काल गणना के मुताबिक, युग चार होते हैं-शतयुग, द्वापर युग, त्रेता युग और कलियुग। चार युगों का एक महायुग होता है और 71 महायुगों का एक मन्वंतर। इसी प्रकार 14 मन्वंतरों का एक कल्प होता जो ब्रह्मा का एक दिन कहलाता है। ब्रह्मा की आयु एक सौ वर्ष है। कलियुग की कालावधि 4,32,000 वर्ष है। वर्तमान में कलियुग की 52वीं सदी चल रही है। 

    एक जनवरी को जो हम नया साल मनाते हैं वह ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार है। 

    दुनिया के देशों में ग्रेगोरियन के अलावा कई अन्य कैलेंडर भी काफी प्रचलित हैं। हिजरी संवत को छोड़ कर सभी कैलेंडर में जनवरी या फरवरी में नया साल शुरू होता है। यही नहीं, भारत में भी कई कक्लेंडर प्रचलित हैं, जिनमें विक्रम संवत और शक संवत प्रमुख हैं। 

    दुनिया के कुछ प्रमुख कैलेंडर इस प्रकार हैं : 

    ग्रेगोरियन कैलेंडर : ग्रेगोरियन कैलेंडर का आरंभ ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह के जन्म के चार साल बाद हुआ। इसे एनो डोमिनी अर्थात ईश्वर का वर्ष कहते हैं। यह कैलेंडर सौर वर्ष पर आधारित है और पूरी दुनिया में इसका इस्तेमाल होता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के महीने 30 और 31 दिन के होते हैं, लेकिन फरवरी में सिर्फ 28 दिन होते हैं। प्रत्येक चार साल बाद लीप ईयर आता है जिसमें फरवरी में 29 और वर्ष में 366 दिन होते हैं। 

    हिब्रू कैलेंडर: हिब्रू कैलेंडर ग्रेगोरियन कैलेंडर से पुराना है। यहूदी अपने दैनिक काम-काज के लिए इसका प्रयोग करते थे। इस कैलेंडर का आधार भी चंद्र चक्र ही है, लेकिन बाद में इसमें चंद्र और सूर्य दोनों चक्रों का समावेश किया गया। इस कैलेंडर का पहला महीना शेवात 30 दिनों का और अंतिम महीना तेवेन 29 दिनों का होते हैं 

    हिजरी कैलेंडर : हिजरी कैलेंडर का आरंभ 16 जुलाई 622 को हुआ। इस दिन इस्लाम के प्रवर्तक हजरत मुहम्मद मक्का छोड़कर मदीना को प्रस्थान किए थे। इस घटना को हिजरत और हिजरी संवत चांद्र वर्ष पर आधारित है और इसमें साल में 354 दिन होते हैं। सौर वर्ष से 11 दिन छोटा होने के कारण कैलेंडर वर्ष के अंतिम माह में कुछ दिन जोड़ दिये जाते हैं। 

    चीनी कैलेंडर : चीनी कैलेंडर का ईजाद ईसा पूर्व लगभग दो हजार साल पहले हुआ। इस कैलेंडर में चंद्र और सौर दोनों चक्रों का समावेश है। 

    विक्रम संवत : विक्रम संवत के आरंभ होने की तिथि के संबंध में विद्वानों में काफी मतभेद है। हालांकि ऐसा माना जाता है कि गर्दभिल्ल पुत्र विक्रमादित्य ने अवंती के शकों को निष्कासित कर ईसा पूर्व 57 में विक्रम संवत चलाया था। विक्रम संवत चांद्र वर्ष पर आधारित है और अन्य चंद्र चक्र आधारित कैलेंडरों के अनुसार इसमें भी वर्ष में दिनों का आधिक्य होता है जिसका समायोजन मलमास या अधिमास से किया जाता है। 

    शक संवत : कुषााण वंश के राजा कनिष्क को शक संवत का प्रवर्तक माना जाता है और इसकी स्थापना 78 ईस्वी में बताया जाता है। यह कैलेंडर भी चांद्र वर्ष पर आधारित है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। 

    भारत में कालान्तर में कुछ और कैलेंडर का विकास हुआ जिनमें गुप्त संवत (319-320 ईस्वी) और बांग्ला संवत (593-594 ईस्वी) प्रमुख है। बांग्ला संवत के अनुसार 14 अप्रैल को नया साल मनाया जाता है। 

    मारवाड़ियों का नया साल दीवापली के दिन आरंभ होता है जबकि गुजरातियों का नया साल दीपावली के अगले दिन आरंभ होता है। लेकिन महाराष्ट्र में गुड़ी पर्व चैत्र प्रतिपदा को ही मनाया जाता है। वहीं, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में उगादि पर्व भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही मनाया जाता है जोकि वस्तुत: युगादि का उत्सव है। 

    पूरी दुनिया में काल गणना के दो ही आधार हैं- सौर चक्र और चांद्र चक्र। सौर चक्र के अनुसार पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा करने में 365 दिन और लगभग छह घंटे लगते हैं। इस प्रकार सौर वर्ष पर आधारित कैलेंडर में साल में 365 दिन होते हैं जबकि चांद्र वर्ष पर आधारित कैलेंडरों में साल में 354 दिन होते हैं।

    Post Top Ad


    Post Bottom Ad


    Blogger द्वारा संचालित.