Header Ads

  • INA BREAKING NEWS

    मौत को दी मात - लिखा काव्यसंग्रह : प्रकाश यादव


    जिजीविषा - प्रकाश यादव “निर्भीक” समीक्षा-शशि पाण्डेय


    शब्दों की अभिव्यक्ति सरल हो सकती है मगर भावों की अभिव्यक्ति उतनी सहज नहीं होती । संवेदनाए संरचना को जन्म देती हैं । ये संवेदनाएं इंसान की स्थिति, दिशा और मनोदशा पर निर्भर करती हैं । "जिजीविषा" ऐसा ही संवेदनाओं का काव्यसंग्रह जो लिखा है प्रकाश जी ने उन दिनों लिखा जब वह कैंसर जैसी बिमारी से दो चार हो रहे थे। रचनाएं लिखने की स्थितियां भी अलग -अलग होती हैं । कभी तो माहौल बना मन को तैयार कर लिखा जाता है तो कभी मन मे यकायक शब्दों की बाढ आती है ।



    जब कवि या लेखक मन व्यथित हो तो उसकी संवेदनाओं की व्याख्या कर पाना सूरज को टॉर्च दिखाने जैसा है। जिजीविषा प्रकाश जी द्वारा रचित मात्र कविता संग्रह नही बल्कि मौत के नजदीक जाकर जीवन के दर्शन को शब्दों में उद्घृत की गयी रचनाओं का काव्य संग्रह है ।

    प्रकाश जी की पहली रचना “मौत से भय नहीं” किसी सैनिक की तरह मौत के सामने डटकर खड़े रहने की अपार भाव गर्भित लिये है।
    इन्होनें जिस हौंसलें और हिम्मत के साथ अपने दर्द के दौर को जिया और उसको शब्दों में जाहिर किया वह सच में उनके उपनाम के जैसा निर्भीक कार्य था ।


    असल में साहित्य का कार्य होता है समाज को दिशा देना । सत्य दिखाना। सकारात्मकता का माहौल तैयार करना । इन्हीं भावों की पुष्टि करता है यह शीर्षक “उम्मीदें कायम है”।



    यह सब प्रकाश के इस अनूठे काव्य संग्रह में मिलता है । कवि का यह अदम्य सामर्थ्य है जहां वह दर्द से दो चार होता हुआ मृत्यु के कटु सत्य जानने के बाद भी जीवन जीने की अद्भुद लालसा दिखायी है ।कैसे छोटी-छोटी बातें जीवन को प्रेरित करती हैं वह आपकी रचनाओं मे मिलता है।
    प्रकाश जी की रचनाएं न खुद उनके लिये संबल बनी बल्कि जो भी इंसान इन रचनाओं को पढे वह सकारात्मकता से भर जायेगा ।हारे से हारे हुये इंसान के लिये भी ये रचनाएं जीवन का आधार बन जायेगा । जिजीविषा सभी के लिये जिजीविषा बने और आप यूं सुंदर रचनाओं की रचना करते रहें ।इन्हीं शुभकामनाओं के जिजीविषा कालजयी बनें ।



    जिजीविषा(काव्य संग्रह)
    लेखक- प्रकाश यादव “निर्भीक”

    समीक्षक- शशि पाण्डेय, नयी दिल्ली


    Post Top Ad


    Post Bottom Ad


    Blogger द्वारा संचालित.