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    एनएच 74 घोटाला मामले में पीसीएस अधिकारी एवं चकबंदी अधिकारी गिरफ्तार



    चकबंदी।अधिकारी अमर सिंह भी गिरफ्त में, न्यायालय ने पेशी के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा

    नैनीताल प्रदेश के बहुचर्चित 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 मुआवजा घोटाला में बृहस्पतिवार को एसआईटी ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए मामले में वांछित पीसीएस अधिकारी नंदन सिंह नगन्याल एवं चकबंदी अधिकारी अमर सिंह को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त कर ली। दोनों को विशेष प्रभारी न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अरविंद कुमार की अदालत में पेश किया गया। जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेशों के बाद देर शाम जेल भेज दिया गया। उल्लेखनीय है कि इस प्रकार मामले में कुल 3 पीसीएस अधिकारियों सहित 17 लोग सींखचों के पीछे आ गये हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी।
    बृहस्पतिवार को इस मामले की विवेचना कर रहे विशेष जांच दल यानी एसआईटी की टीम के सदस्य अपराह्न में एसडीएम रहे पीसीएस अधिकारी नगन्याल व चकबंदी अधिकारी अमर सिंह को गिरफ्तार कर विशेष प्रभारी न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अरविंद कुमार की अदालत में पेश करने के लिए लाई। इस दौरान मुख्यालय में मौजूद ऊधम सिंह नगर जिले के एसएसपी डा. सदानंद दाते ने बताया कि एफएसए की रिपोर्ट आने के बाद नगन्याल को रुद्रपुर से गिरफ्तार किया गया।

    नगन्याल पर आरोप है कि बाजपुर तहसील में एक ही दिन में पुरानी तिथियों पर जेडएलआरए अधिनियम की धारा 143 के तहत बहुत सारे मामलों में कृषि भूमि को अकृषक कर किसानों को करोड़ों रुपए का अतिरिक्त मुआवजा दिलाया गया था, और इसके ऐवज में अधिकारियों ने कमीशन भी लिया था। इनमें वह भी शामिल हैं। आगे अन्य कार्रवाइयां भी की जा सकती हैं। उल्लेखनीय है कि नगन्याल के खिलाफ कुर्की वारंट भी न्यायालय से जारी होकर उसके घर पर चस्पा कर दिया गया था। बताया गया है कि इसके बाद नगन्याल बृहस्पतिवार को खुद ही जांच कर रही पंतनगर पुलिस चौकी चला गया था, जहां से पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

    नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में हल्द्वानी व नैनीताल की जेलों में बंद 15 में से 12 आरोपितों को शनिवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण, जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें बताया कि उनके विरुद्ध जांच एजेंसी ने आरोप पत्र पेश कर दिये हैं, और अदालत उन पर लगे आरोपों का संज्ञान ले रही है। इस पर आरोपितों की ओर से उनके अधिवक्ता ने कहा कि उनके विरुद्ध जांच एजेंसी ने गलत साक्ष्य प्रस्तुत किये हैं, जबकि उनके ऊपर कोई आरोप नहीं बनते हैं, वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने आरोपों को पूरी तरह सही बताया। इसके साथ आरोपितों के विरुद्ध नियमित सुनवाई शुरू हो गयी, तथा अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 28 फरवरी नियत कर दी। बताया कि 28 को इन्हें मामले से संबंधित प्रपत्रों की नकलें दी जाएंगी।

    उल्लेखनीय है कि मुख्य आरोपित नैनीताल व ऊधमसिंह नगर जिले के तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह व निलंबित एसडीएम भगत सिंह फोनिया, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पड़लिया, सेवानिवृत्त प्रभारी तहसीलदार भूरे लाल, पेशकार विकास चौहान, संग्रह अमीन अनिल कुमार, डाटा इंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार, स्टांप वेंडर जीशान, अनुसेवक राम समझ, राजस्व अहलमद संजय कुमार तथा काश्तकार ओम प्रकाश व चरण सिंह के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218 व अन्य के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिये गये हैं।

    तीन आरोपितों की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ी, जमानत अर्जी खारिज
    नैनीताल। उपरोक्त आरोप पत्र पेश हुए 12 आरोपितों के अतिरिक्त इसी मामले में जेल में बंद तीन आरोपित एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह व पेशकार संत राम के खिलाफ विवेचना अभी जारी है। शनिवार को अदालत ने जेल से ही वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इनकी सुनवाई की, और इनकी न्यायिक हिरासत की अवधि को 14 दिन के लिए आगे बढ़ा दिया। इसके अलावा शनिवार को एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह के द्वारा न्यायालय में पेश जमानत प्रार्थना पत्र पर भी सुनवाई हुई। अदालत ने अभियोजन पक्ष के प्रबल विरोध के बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी।

    मामले से संबंधित सील युक्त सामग्री भी अदालत में पेश
    नैनीताल। शनिवार को न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान एसआईटी द्वारा विवेचना के दौरान कब्जे में ली गयी सामग्री को भी सील-मोहर हालत में न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने सील का अवलोकन कर व सील को सही पाते हुए अपनी सील लगा कर कब्जे में ले लिया

    सैयद उवैस अली उत्तराखंड
    मौ. आसिफ सहयोगी

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